सरिस्का में बाघ की मौत प्रशासन की विफलता : रमेश
नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने मंगलवार को स्वीकार किया कि राजस्थान के सरिस्का उद्यान में एक बाघ की मौत 'शासन प्रणाली और प्रशासन' की विफलता के कारण हुई।
रमेश ने यहां संवाददाताओं से कहा, "राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) का एक दल सरिस्का में घटना की जांच कर रहा है। मैं स्वीकार करता हूं कि शासन प्रणाली और प्रशासन विफल रहा है। मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेता हूं।"
मरने वाले बाघ को रणथम्भौर के राष्ट्रीय उद्यान से सरिस्का लाया गया था। कभी बाघों का अड्डा माने जाने वाले सरिस्का के उद्यान में एक भी बाघ के नहीं रहने का खुलासा होने के बाद इस बाघ को पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत यहां लाया गया था।
रमेश ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नाकामी किसकी रही, राजस्थान सरकार या एनटीसीए की।
रमेश ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि स्थान परिवर्तन कार्यक्रम नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बंद नहीं किया जाएगा।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सरिस्का और रणथम्भौर के इर्द-गिर्द खनन का पट्टा दोनों बाघ उद्यानों के लिए बड़ा खतरा है।
उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में राजस्थान के मुख्यमंत्री को तीन बार पत्र लिख चुका हूं। उन्होंने कहा है कि वह राज्य के बाघ उद्यानों के गई-गिर्द खनन के पट्टों की जल्द ही समीक्षा करवाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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