दिल्ली : अपनों की तलाश में लोग भटक रहे अस्पताल दर अस्पताल
सोमवार शाम पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर में गिरी पांच मंजिला इमारत में रहने वाले लोगों के परिवार अपने संबंधियों के बारे में जानने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं।
कुछ लोग इस आशा के साथ घायल लोगों की सूची देख रहे हैं कि शायद उनके संबंधी जीवित हों।
गृहणी पूजा अपनी 17 साल की ननद को घायल लोगों की सूची में ढूंढ रही थी, लेकिन उसे मृतकों के तस्वीरों के बीच उसकी तस्वीर मिली। उसने बिलखते हुए कहा कि हमलोग उसे कल रात से ढूंढ रहे थे।
सोमवार शाम लक्ष्मी नगर में गिरी इमारत में बंगाल और बिहार के करीब 50 परिवार रहते थे।
हादसे में कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई और 130 लोग जख्मी हुए हैं। मकान में दबे लोगों के संबंधियों का कहना है कि अभी और कई लोग इसमें फंसे हुए हैं।
सुखदेव ने कहा कि हादसे के समय इमारत में कम से कम 200 लोग होंगे। उसकी बहन और जीजा बुरी तरह घायल हुए हैं।
उसने कहा कि मकान के बेसमेंट में पानी जमा था, जिसके कारण नीचे की तीन मंजिलों की दीवार सीलन से टूट गई और ऊपर की मंजिलें बगल के मैदान में जा गिरी।
बिहार के जे. पी. पांडे मलबे में अपनी बहन और उसके परिवार को ढूंढ रहे थे।
उसने कहा कि उनमें से तीन बुरी तरह घायल हुए हैं, लेकिन उसकी बहन का देवर अभी भी नहीं मिला है।
उसने कहा कि पहले उनका परिवार लक्ष्मी नगर की झुग्गियों में रहता था। झुग्गी को उजार देने के बाद वे इस जगह किराया कम होने के कारण आ गए थे।
अस्पताल कर्मी किसी तरह परिजनों को खोजने आने वाले लोगों को संभाल पा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की रहने वाली श्यामली ने रोते हुए कहा कि उसे अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है। कोई उसकी मदद करे।
बिहार के सहरसा के रहने वाले नरेश अपने साथ रहने वाले दो दोस्तों रविंदर और पल्टन को खोजने के लिए अंदर जाना चाहते थे, लेकिन उसे अंदर जाने नहीं दिया जा रहा था।
बाद में कुछ लोगों को बहुत थोड़े समय के लिए अपने घायल सगे-संबंधियों को देखने के लिए अंदर जाने दिया गया।
अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि हम घायलों और मृतकों की पहचान करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
एलएनजेपी अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि वे घायलों के नामों की सूची उनके नाम, लिंग और उम्र के साथ लगा रहे हैं। तब तक 28 घायलों की भर्ती की जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि पहली सूची उन्होंने 1 बजे रात में लगाई।
उन्होंने कहा कि अस्पताल लाए गए 41 मृतकों में से 40 की पहचान नहीं की जा सकी है। उनकी तस्वीर खींच कर बाहर दीवार पर लगाई जा रही है।
फरीदाबाद की वैशाली शर्मा ने कहा कि वे पहले अपने परिजनों को ढूंढने के लिए हेडगेवार अस्पताल गईं। वहां उन्हें एलएनजेपी जाने के लिए कहा गया। वहां फिर उन्हें लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल जाने के लिए कहा गया।
उसने कहा कि वह अस्पतालों के चक्कर लगा रहीं हैं, लेकिन उनके संबंधी कहीं मिल नहीं रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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