पान विक्रेता ने उजागर किया मनरेगा में भ्रष्टाचार

पोरबंदर, 16 नवंबर (आईएएनएस)। गुजरात के पोरबंदर जिले के कोटडा गांव के पान विक्रेता असलम खोक्कर अपने साथ हमेशा एक कागज लेकर चलते हैं। उनका कहना है कि इस कागज में उन लोगों के नाम है जो उन्हें डरा-धमका रहे हैं। दरअसल असलम ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया है।

असलम ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया, "गांव के सरपंच ने मुझे गालियां दीं और डराया-धमकाया। कई अन्य ताकतवर लोग भी चाहते हैं कि मैं खामोश रहूं लेकिन मैं डरूंगा नहीं।"

बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके असलम ने अनजाने में ही मनरेगा में हुए घोटाले का खुलासा कर दिया है।

कुछ दिन पहले वह जूनागढ़ में युवा कांग्रेस के एक शिविर में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने इंटरनेट का इस्तेमाल सीखा था।

उन्होंने बताया, "हमें शिविर में बताया गया था कि हम अपने क्षेत्र में हुए विकास कार्यो की जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं।"

ग्रामीण क्षेत्र के बेहद गरीब लोगों के लिए शुरू हुई रोजगार की मनरेगा योजना का लाभ पाने वाले लोगों की सूची में उन्होंने अपने एक मित्र का नाम देखा था। उनका यह मित्र एक शासकीय कर्मचारी है।

असलम ने बताया, "मैंने और जानकारी इकट्ठी की। मैंने सूची में प्रवासी भारतीयों, चिकित्सकों, इंजीनियरों, शिक्षकों और सम्पन्न किसानों के नाम देखे।"

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पोरबंदर जिले की कुटियाना तहसील के कोटडा गांव में 963 मनरेगा कार्डधारक हैं। पिछले तीन सालों के दौरान उन पर कुल 95 लाख रुपये खर्च हुए हैं।

असलम ने इस संबंध में और जानकारी इकट्ठी करने के लिए सूचना का अधिकार (आटीआई) कानून के तहत आवेदन किया था लेकिन उन्हें फोन पर जान से मारने की धमकियां मिलनी शुरू हो गईं।

उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक को भी इस बारे में लिखा और उनसे सुरक्षा मांगी लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। असलम ने स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी अपनी समस्या बताई।

गरीबों का पैसा हड़पने के आरोप में पिछले सप्ताह पुलिस ने स्थानीय डाकिये (पोस्टमास्टर) और सरपंच के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है।

जिला विकास अधिकारी के.डी. भट्ट के मुताबिक मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

अब सवाल यह है कि चूंकि असलम की यह कहानी कांग्रेस के एक शिविर से शुरू होती है और गांव का सरपंच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से है, तो क्या इस मामले में सही कार्रवाई हो पाएगी।

भट्ट कहते हैं कि राजनीति की इसमें कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए, जो गलत है वह गलत है। उन्होंने कहा कि इस खुलासे के बाद अन्य गांवों में भी जांच होनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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