मलबे में दबे लोगों की थमती जा रही है आवाज

सोमवार शाम इमारत गिरने के बाद से मंगलवार दिन तक चल रहे बचाव कार्य के बीच शोकाकुल परिवार बाहर पल-पल की खबर जानने के लिए व्यग्र हैं।

जमुना देवी ने बताया कि उसका 50 साल का बेटा अपने दोस्तों के साथ मकान के बाहर खड़ा था। हमें लगा कि भूकंप आया है।

उसने लोगों से उसके बेटे को बचाने की मिन्नत करते हुए आईएएनएस को बताया कि उसके बेटे ने उसके दूसरे बेटे को मलबे के अंदर से कल रात मोबाइल से फोन किया था। वह रोते हुए बता रहा था कि वह अभी भी मलबे में फंसा हुआ है।

सुबह से उसका फोन बंद हो चुका है।

पास ही खड़े एक अन्य व्यक्ति ने रोते हुए पत्रकारों को कहा कि कोई उसके बेटे को बचाए। उसके तीन बेटे अंदर फंसे हुए थे। दो को निकाल लिया गया लेकिन 12 साल का तीसरा बेटा अभी भी अंदर फंसा हुआ है। कोई उसे बचाए। अब और बर्दाश्त नहीं होता।

स्थानीय लोगों ने कहा कि अभी भी मलबे के अंदर से चीख-पुकार सुनाई पड़ती है, लेकिन अब ये आवाजें बहुत कम हो गई हैं।

स्थानीय निवासी राम निवास ने कहा कि उसे अभी भी अंदर से 'बचाओ-बचाओ' की आवाज सुनाई पड़ती है, लेकिन यह कल रात जितनी नहीं है।

हादसे में जीवित बचे विनोद कुमार ने कहा कि यदि हादसा एक घंटा देर से होता, तो और भी लोग इसकी चपेट में आते।

इस मकान में हमेशा 100 लोग मौजूद रहते थे। एक चाय वाला ने कहा कि उसका दो बेटा मकान के अंदर था। एक मर गया लेकिन वह अभी भी दूसरे को बाहर निकाले जाने का इंतजार कर रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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