अबु सलेम को सजा की घोषणा 19 नवंबर को (लीड-1)
जिला अभियोजन अधिकारी राजेश रायकवार ने बताया है फर्जी पासपोर्ट बनाने के आरोप में अबु सलेम पर तीन धाराओं के तहत प्रकरण चल रहा था। इस पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) आर.जी. सिंह ने भारतीय दंड संहिता की धारा 471 और पासपोर्ट की धारा 12 (ख) के तहत अबु सलेम को दोषी करार दिया है। वहीं उसे फर्जी दस्तवेज के इस्तेमाल करने के आरोप से बरी कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि न्यायालय सजा की घोषणा 19 नवंबर को करेगा। अबु सलेम को दो से सात साल तक की कैद हो सकती है।
मालूम हो कि वर्ष 2001 में अबु सलेम का दानिश बेग, उनकी पत्नी समीरा जुमानी का रुबीना बेग और पूर्व प्रेमिका मोनिका बेदी का फौजिया उस्मान के फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाया गया था। ये पासपोर्ट क्षेत्रीय कार्यालय से जारी किए गए थे। इस पर भोपाल के कोह-ए-फिजा थाने में 2001 में मामला दर्ज कराया गया था।
प्रकरण के मुताबिक भोपाल निवासी सैयद अब्दुल जलील शिराज ने इन तीनों के पासपोर्ट बनवाने में मदद की थी। इतना ही नहीं, भोपाल में राशनकार्ड भी बनाए गए थे। ट्रेवल्स एजेंट को 35 हजार रुपये प्रति पासपोर्ट की दर से पासपोर्ट बनाने का जिम्मा दिया गया था। थाने में मामला दर्ज होने के बाद शिराज खुद वादा माफ गवाह बन गया।
फर्जी पासपोर्ट मामले की सहअभियुक्त मोनिका बेदी को अबु सलेम के साथ लिस्बन से गिरफ्तार किया गया था और उसे लगभग एक साल भोपाल जेल में रहना पड़ा था। इस मामले से मोनिका और दो अन्य आरोपियों को पूर्व में बरी किया जा चुका है।
इस मामले में सलेम पर चल रहे मामले की सुनवाई एक नवंबर को पूरी हो चुकी थी और वह तभी से भोपाल के केंद्रीय कारागार में है। फैसला मंगलवार को आया, जिसमें सीजेएम आर.जे. सिंह ने सलेम को दोषी करार दिया। तीन में से दो धाराओं मे दोषी करार देने के साथ सजा सुनाने की तारीख 19 नवंबर मुकर्रर की गई।
अबु सलेम पर चल रहे फर्जी पासपोर्ट मामले पर फैसला आने के मद्देनजर मंगलवार को न्यायालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बम निरोधक दस्ते से लेकर खोजी कुत्तों तक ने न्यायालय परिसर का जायजा लिया। वहीं पुलिस बल हर आने-जाने वाले पर नजर रखे हुए था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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