भूमि सौदे पर येदियुरप्पा के दावों को कृष्णा ने खारिज किया
बेंगलुरू, 16 नवंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने सोमवार देर रात इस बात से इंकार किया कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल (1999-2004) में राज्य में कुछ लोगों को आवंटित किए जाने के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा अधिगृहीत भूमि को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया था।
कृष्णा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें उन्होंने सोमवार को कहा था कि न केवल उन्होंने, बल्कि उनके पूर्ववर्तियो ने भी भूमि को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर लोगों को आवंटित किया था।
कृष्णा ने यहां एक बयान में कहा कि अक्टूबर 1999 और जून 2004 के बीच विभिन्न सरकारी विभागों के इस्तेमाल में लाए जाने के लिए 2,000 एकड़ से अधिक भूमि को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया गया था।
दरअसल, बेंगलुरू में बाहरी रिंग रोड के निर्माण के लिए तथा कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने के लिए तथा अन्य परियोजनाओं के लिए भूमि को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया गया था।
येदियुरप्पा ने कहा था कि कृष्णा के शासनकाल के दौरान 633 एकड़ भूमि सरकारी नियंत्रण से मुक्त की गई थी।
येदियुरप्पा ने सोमवार को पिछले 10 वर्षो के दौरान सरकार के नियंत्रण से मुक्त की गई भूमि तथा मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोटे से आवंटित किए गए आवसीय भूखंडों का विवरण मीडिया के सामने पेश किया गया था। उन्होंने इस बात का खंडन किया था कि अपने बेटों को भूखंड आवंटित करने में उन्होंने कुछ गलत किया था।
येदियु़रप्पा ने ये विवरण तब प्रस्तुत किया, जब उनके बेटों से सम्बंधित मोटर-गाड़ियों के कल-पुर्जे बनाने वाली एक कम्पनी को जिगानी औद्योगिक क्षेत्र में 2007 में 15 दिनों के भीतर एक प्रमुख भूखंड उपलब्ध कराए जाने में नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। येदियुरप्पा उस समय राज्य के उप मुख्यमंत्री थे।
येदियुरप्प के दोनों बेटे उस कम्पनी के निदेशक हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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