राजा ने प्रधानमंत्री का सुझाव नजरअंदाज किया था : कैग
ज्ञात हो कि राजा ने रविवार की रात संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
संसद के दोनों सदनों में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राजा ने इस मामले में न केवल प्रधानमंत्री के सुझाव को दरकिनार किया था, बल्कि वित्त मंत्री और कानून मंत्री के सुझाव को भी नजरअंदाज कर दिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2007-08 में स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस और दोहरी प्रौद्योगिकी के लिए 35 लाइसेंस जारी किए जाने से सरकार को 1,76,645 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
नुकसान की इस धनराशि की गिनती इस वर्ष के प्रारम्भ में 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को हुई 67,000 करोड़ रुपये की आमदनी के आधार पर की गई है।
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है, "संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस मामले में मनमाने तरीके से निर्णय लेने का निश्चय किया कि आशय का पत्र 25 सितम्बर, 2007 को जारी कर दिया जाएगा और प्राप्त आवेदनों पर निर्णय पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर लिया जाएगा।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "प्रधानमंत्री ने नवम्बर 2007 में मंत्रालय को पत्र लिखा था। पत्र में नीलामी की पारदर्शी पद्धति अपनाने, प्रवेश शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया गया था।"
लोकसभा में इस रिपोर्ट को वित्त राज्य मंत्री एस.एस.पालानिमनिकम ने पेश किया। पालानिमनिकम राजा की पार्टी, डीएमके से सम्बद्ध हैं। राज्यसभा में दूसरे वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने रिपोर्ट पेश किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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