ुदिल्ली में इमारत ढहने से मरने वालों की संख्या 65, मुआवजा घोषित (लीड-3)
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस हादसे से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को दो लाख रुपये की राशि दी जाएगी।
मंगलवार को घटनास्थल का जायजा लेने के बाद दीक्षित ने संवाददाताओं से कहा, "इस तरह के मामले में हम एक लाख रुपये का मुआवजा देते हैं लेकिन हमने मुआवजे की राशि दोगुनी कर दी है। हर घायल को 50,000 रुपये की राशि दी जाएगी और उसका मुफ्त उपचार किया जाएगा।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कम से कम 80 घायलों को इलाज के लिए चार अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सिर पर चोट लगने की वजह से इनमें से बहुत से लोगों की हालत नाजुक है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "इस घटना की आधिकारिक जांच का आदेश दिया गया है। हमें कोई कार्रवाई करने से पहले जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा करनी होगी। पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।"
अमृत सिंह घटना के बाद से फरार है। घटना के दूसरे दिन मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि मलबे के नीचे कुछ लोगों के दबे होने की आशंका है।
यह हादसा सोमवार रात 8.15 बजे हुआ। इस इमारत में ज्यादातर कामगार तबके लोग रहते थे। इनमें से ज्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग थे।
दिल्ली के उप राज्यपाल तेजेंद्र खन्ना ने कहा, "हमने रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर एस. के. भट्टाचार्य से सम्पर्क साधा है। वह एक दल के साथ शाहदरा जोन (पूर्वी दिल्ली) में इमारतों का सर्वेक्षण करेंगे।"
खन्ना ने कहा, "अगर कोई इमारत असुरक्षित पाई जाएगी तो उसकी मरम्मत कराई जाएगी। परंतु वह मरम्मत के लायक नहीं होगी तो उसे सील करके गिरा दिया जाएगा। शाहदरा जोन में हमेशा ही इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं।"
इधर, घटनास्थल पर बचाव कार्य जोरों पर है। बचाव कार्य में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी जुटे हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने बताया कि बचाव कार्य में करीब 300 लोगों को लगाया गया है। घायलों को लोक नायक जयप्रकाश नारायण और लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
शीला ने इस घटना के लिए दिल्ली नगर निगम को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा, "यहां निगम की ओर से लापरवाही बरती गई है। बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के कोई इमारत वैध नहीं मानी जा सकती है। यह एक अवैध इमारत थी।"
कॉलोनी की तंग गलियों की वजह से रात के समय क्रेन और अन्य उपकरणों के घटना स्थल पर पहुंचने में देरी हुई। अंधेरे और बूंदाबांदी ने भी राहत एवं बचाव कार्यो में बाधा पहुंचाई। स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं।
दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अवैध रूप से किए गए निर्माण के चलते इमारत गिरी होगी। निगम के एक अधिकारी ने बताया, "महावीर एंक्लेव में तीन दिन पहले हमने पांच मंजिली इमारत के अवैध निर्माण को तोड़कर उसे गिरने से रोका था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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