2जी स्पेक्ट्रम : 'राजा ने आवंटन मनमाने तरीके से किया'
न्यायाधीश जी.एस. सिंघवी और न्यायाधीश ए.के. गांगुली की खंडपीठ को बताया गया कि 575 आवेदकों में से मात्र 122 आवेदकों को लाइसेंस के देने के लिए कट ऑफ की तिथि में अवैध और गैरकानूनी तरीके से परिवर्तन किया गया।
न्यायालय को बताया गया कि जिन कंपनियों को स्पेक्ट्रम का लाइसेंस जारी किया गया वे अयोग्य थीं।
'सेंटर फॉर पबिल्क इंटेरेस्ट लिटिगेशन' के याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने न्यायालय को अवगत कराया कि पारदर्शी सार्वजनिक नीलामी के बजाय लाइसेंस का आवंटन अवैध तरीके से पहले आओ पहले पाओ (एफसीएफएस) के आधार पर किया गया।
वकील ने बताया, "यहां तक कि एफसीएफएस प्रक्रिया भी उचित तरीके से नहीं अपनाई गई।
वरिष्ठ वकील ने बताया कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को जो हलफनामा न्यायालय में दाखिल किया है और इसमें जो तर्क दिए गए हैं, वही तर्क दूर संचार मंत्रालय ने कैग के समक्ष प्रस्तुत किए थे, जिन्हें खारिज कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि महानिदेशक लेखापरीक्षक (पोस्ट एवं टेलीग्राफ) ने भी स्पेक्ट्रम आवंटन में खामियां पाई हैं। भूषण ने कहा कि वर्ष 2001 के कीमतों को आधार बनाकर वर्ष 2008 में लाइसेंस जारी किए गए। उस समय दूरसंचार बाजार प्रारंभिक अवस्था में था, जबकि वर्ष 2008 में इसका स्वरूप काफी बदल चुका था।
उल्लेखनीय है कि इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार को भी सुनवाई करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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