स्थानीय भाषाओं को डिजिटल स्वरुप दिया जाए : कलाम
यहां प्रशासन अकादमी में 'लेंग्वेज कंप्यूटिंग' कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कलाम ने कहा कि समृद्घ और विकासशील भारत के निर्माण में 'लेंग्वेज कंप्यूटिंग' बहुत महत्वपूर्ण है। स्थानीय भाषाओं का डिजिटल रूप देना ही सही अर्थो में 'लेंग्वेज कंप्यूटिंग' है। इतना ही नहीं देशी भाषाओं के विरासत दस्तावेज को डिजिटल रूप में बदलकर ऑप्टीकल कैरेक्टर रिकग्नाइजेशन के जरिए यूनिकोड में बदला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाषाओं के स्वरूप में बदलाव से इंटरनेट के जरिए इसका फायदा आम लोगों को मिलेगा।
कलाम ने कहा कि इस तरह का बदलाव होने से अंग्रेजी भाषा की बाध्यता खत्म हो जाएगी और अंग्रेजी न जानने वाले भी इस ज्ञान को हासिल कर सकेंगे। अगर देशी भाषा विशेषकर हिंदी का कंप्यूटरीकरण होता है, तो इसका फयदा बहुत बड़े वर्ग को होगा।
पूर्व राष्ट्रपति ने यूनिकोड के महत्व के बारे में कहा कि ऐसा होने से राज्य सरकारें स्थानीय भाषाओं में बेहतर जानकारी दे सकेंगी। इस सुविधा के जरिए राज्य के किसी गांव का किसान अपने मोबाइल पर अपनी भाषा में तमिलनाडु की कृषि तकनीक सहित अन्य जानकारियां हासिल कर सकेंगे।
इस मौके पर प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस, प्रशासन अकादमी के महानिदेशक प्रशांत मेहता भी मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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