नेपाल में प्रधानमंत्री चुनाव के 17वें दौर पर अनिश्चितता
काठमांडू, 15 नवंबर (आईएएनएस)। नेपाल में सोमवार को प्रधानमंत्री पद के विवादास्पद चुनाव का 17वां दौर स्थगित किए जाने के कयासों के बीच देश की शीर्ष तीन पार्टियों ने इस स्थिति से उबरने का कोई रास्ता निकालने के लिए बातचीत की अंतिम कोशिशें शुरू कर दी हैं।
काठमांडू के गोकर्ना में स्थित एक आलीशान रिसोर्ट में सत्ताधारी कम्युनिस्टों, उनके सहयोगियों, नेपाली कांग्रेस, और विपक्षी माओवादी पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निंदा किए जाने के बाद विफल चुनाव के एक और दौर को रोकने के लिए सोमवार को बातचीत शुरू की।
पिछले सप्ताह दो वकीलों ने इस व्यर्थ की चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की थी। उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद को कोई रास्ता निकालना चाहिए। अदालत ने कहा था कि या तो निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव किया जाए या फिर मैदान में बचे एक मात्र उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाए।
वकीलों ने यह याचिका तब दायर की, जब जुलाई से लेकर अब तक 16 दौर का चुनाव सम्पन्न हो जाने के बाद भी संसद नया प्रधानमंत्री नहीं चुना सका है।
नेपाल की अनोखी चुनावी प्रक्रिया का तकाजा यह है कि प्रधानमंत्री पद का चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 601 सदस्यीय सदन में सामान्य बहुमत पाना जरूरी है।
माओवादियों और कम्युनिस्टों द्वारा मतदान में हिस्सा न लेने के कारण हालांकि सामान्य बहुमत के लिए जरूरी 300 सीटें जीत पाना किसी भी उम्मीदवार के लिए असम्भव हो गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि या तो मैदान में बाकी बचे उम्मीदवार, राम चंद्र पौडल को विजयी घोषित कर दिया जाए, या फिर निर्वाचन प्रक्रिया को संशोधित कर दिया जाए।
जहां माओवादी और कम्युनिस्ट निर्वाचन प्रक्रिया में संशोधन की वकालत कर रहे हैं, ताकि वे चुनावी मैदान में वापस लौट सकें, वहीं पौडल की नेपाली कांग्रेस इससे सहमत नहीं है। उसे डर है कि माओवादियों और कम्युनिस्टों का अवसरवादी चुनावी गठबंधन उन्हें सत्ता में आने में मदद कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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