आगरा की सड़कों पर जीवंत हुई कृष्ण लीला
आगरा, 15 नवंबर (आईएएनएस)। श्रीकृष्ण लीला पेश करने की शताब्दी पुरानी 10 दिवसीय नाट्य परम्परा में इस बार नयापन देखने को मिला और आगरा की सड़कों पर भगवान कृष्ण की लीलाएं जीवंत हो उठीं। अपनी भव्यता के लिहाज से यह आयोजन रामलीला सरीखा है।
कृष्ण लीला में लोगों की रुचि फिर से जागृत करने वाले पंडित महेश शर्मा कहते हैं, "आगरा में श्रीकृष्ण लीला के अनूठे आयोजन का स्तर नीचे जा रहा था, लोगों की इसमें रुचि कम हो रही थी और इसे प्रचारक नहीं मिल रहे थे लेकिन इस साल पूरे जोश के साथ इसकी वापसी हुई है।"
श्रीकृष्ण लीला के तहत बालकेश्वर गौशाला स्थित एक खुले मैदान में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर उनके द्वारा कंस वध किए जाने तक की कहानियां पेश की जाती हैं। दीपावली के कुछ दिन बाद ही कृष्ण लीला की शुरुआत हो जाती है और यह 21 नवंबर को पूर्णमासी तक चलती है।
मैदान को एक थियेटर जैसा रूप दे दिया जाता है और दर्शकों के बैठने के लिए सीढ़ियों की व्यवस्था की जाती है। अक्सर श्रीकृष्ण लीला को रास लीला समझा जाता है। रास लीला बृज क्षेत्र की अनूठी संगीत-नाटक परम्परा है। मथुरा और वृंदावन के प्रशिक्षित कलाकार यहां अपनी प्रस्तुति देते हैं।
शर्मा ने आईएएनएस को बताया, "इस साल एक नई चीज शामिल की गई। वे रामलीला में जनकपुरी बनाते हैं, हम द्वारकापुरी बना रहे हैं। अंतिम दिन एक बड़े से मंच पर प्रस्तुति होगी।"
प्रस्तुति का निर्देशन करने वाले वृंदावन के श्रीराम शर्मा निमाई कहते हैं कि परम्परा से हटकर उन्होंने इस साल श्रीकृष्ण लीला में महाभारत की कुछ घटनाएं शामिल की हैं। अभिमन्यु का रथ और उसके चक्रव्यूह तोड़ने की घटना लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
उन्होंने बताया कि रविवार को श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलदेव के भेष में सैकड़ों गायों के साथ कलाकार आगरा की सड़कों पर उतरे थे। राधा का जन्मदिन भी बड़े पैमाने पर मनाया गया था।
एक शताब्दी पहले आगरा के बालकेश्वर मैदान में श्रीकृष्ण लीला की शुरुआत हुई थी। शर्मा कहते हैं कि देश में और किसी भी स्थान पर इतने बड़े पैमाने पर श्रीकृष्ण लीला का आयोजन नहीं होता।
इसमें 'फूलों की होली', 'माखन चोरी', 'नरसी चरित्र', 'नरसी का भात', 'नैनीबाई का मायेरा' और 'श्रीकृष्ण जन्म' को खासतौर पर शामिल किया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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