राजा मसले पर कांग्रेस की बैठक, डीएमके का इस्तीफे से इंकार (राउंडअप)

राजा को पद से न हटाने पर विपक्षी पार्टियों ने पहले ही संसद ठप्प करने की धमकी दी है। कांग्रेस ने कहा है कि वह इस मामले में संसद में अपनी बात रखेगी। उधर सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को राजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। इस बीच इस मसले पर विचार के लिए रविवार को डीएमके के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने राजा और सांसद टी.आर. बालू से मुलाकात की।

नई दिल्ली में एक समारोह से इतर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा की संलिप्तता के संबंध में कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो कुछ भी कहना है वह संसद में कहेंगे।

इससे पहले इस मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।

कांग्रेस नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक संसद भवन में हुई। नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद बैठक की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी शामिल हुए।

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में यह राय थी कि राजा को मंत्रिमंडल में रहने देने का फैसला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर छोड़ देना चाहिए। पार्टी आलाकमान ने राजा के उस बयान पर भी विचार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मोबाइल नम्बर पोर्टबिलिटी के प्रस्तावित प्रावधान को लेकर विरोधी खेमा उन्हें निशाना बना रहा है।

कांग्रेस नेताओं की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी पार्टियों ने राजा को उनके पद से न हटाए जाने पर संसद की कार्यवाही ठप्प करने की धमकी दी है। विपक्ष राजा के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इसी वजह से संसद के शीतकालीन सत्र के शुरुआती तीन दिनों में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

दूसरी ओर दूरसंचार मंत्री राजा के खिलाफ दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा। स्वयंसेवी संगठन सीपीआईएल और सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा दायर इस याचिका पर न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और ए. के. गांगुली की खंडपीठ में सुनवाई होगी।

राजा कांग्रेस की सहयोगी डीएमके के सांसद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने वित्त और कानून मंत्रालय के सुझावों को ताक पर रखते हुए 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया। इससे सरकार को 170,000 करोड़ रुपये की चपत लगी।

उधर, इस मामले में विपक्षी पार्टियों द्वारा राजा को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) झुकने को तैयार नहीं है।

डीएमके सूत्रों ने बताया कि पार्टी राजा के समर्थन में है और वह अन्य सहयोगियों के हितों की रक्षा करते हुए गठबंधन राजनीति की जिम्मेदारी निभाना जानती है।

नाम उजागर न करने की शर्त पर डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया कि पार्टी अभी भी अपने पुराने रुख पर कायम है। पार्टी राजा का समर्थन करती है।

उधर, रविवार को डीएमके के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने राजा और सांसद टी.आर. बालू से मुलाकात की।

डीएमके के एक पदाधिकारी ने बताया, "विपक्षी पार्टियों ने धमकी दी है कि यदि राजा को उनके पद से नहीं हटाया जाता तो वे सोमवार को संसद की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। यह सरकार को ब्लैकमेल करने का तरीका है।"

उन्होंने कहा कि डीएमके गठबंधन के धर्म को निभाना जानती है। राजा को हटाने के लिए कांग्रेस पर काफी दबाव डाला जा रहा है। संकट आने पर लोगों की नहीं पार्टी के हित की बात सोची जाएगी।

पदाधिकारी ने कहा यदि वर्तमान समय में राजा को हटाया जाता है तो ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) इसे अपनी जीत के रूप में लेगी।

उल्लेखनीय है कि एआईएडीएमके की महासचिव जयललिता ने गत गुरुवार को कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की थी। जयललिता ने कहा था कि यदि राजा को हटाने पर डीएमके अपना समर्थन वापस लेती है तो वह सरकार को अपनी पार्टी का समर्थन देंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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