शिमला के शिखर पर महाबली (फोटो सहित)
नई दिल्ली, 14 नवंबर (आईएएनएस)। वैसे तो पूरे हिमाचल प्रदेश को देवभूमि माना जाता है, लेकिन यहां कुछ स्थल ऐसे हैं, जिन्हें विशेष श्रद्धा और विश्वास की दृष्टि से देखा जाता है। ये स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित जाखू मंदिर ऐसा ही एक स्थल है। यहां स्थित महाबली हनुमान का मंदिर देश ही नहीं दुनिया भर में चर्चित है और शिमला आने वाला शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होता होगा, जो इस मंदिर में दर्शन करने न जाता होगा।
अब इस स्थल की प्रतिष्ठा और बढ़ गई है। यहां हनुमान की 108 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। प्रतिमा की ऊंचाई और जिस स्थल पर प्रतिमा स्थापित की गई है, उस स्थल की ऊंचाई के मामले में यह दुनिया में अपने आप में एक कीर्तिमान है। हाल ही में हनुमान जयंती के दिन इस प्रतिमा का अनावरण किया गया।
प्रतिमा की स्थापना एच.सी.नंदा न्यास की ओर से किया गया है। यह संस्था ओरल केयर उत्पाद बनाने वाली कम्पनी, जेएचएस स्वेंडगार्ड लैबोरेटरीज लिमिटेड से सम्बंधित एक समाज सेवी संस्था है। यह संस्था समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए काम करती है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और फिल्म अभिनेता अभिषेक बच्चन ने इस विशाल हनुमान प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने धार्मिक रस में ओत-प्रोत रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। भजन और नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की गईं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धूमल ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्ध दोहराई। उन्होंने कहा कि जाखू मंदिर में हनुमान की विशाल प्रतिमा स्थापित हो जाने से इस स्थान का आकर्षण और बढ़ गया है और अब दुनिया भर से लोग इस प्रतिमा को देखने आएंगे।
अभिनेता अभिषेक बच्चन ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के विकास में राज्य सरकार के साथ सहयोग करने के लिए वह हमेशा तैयार रहेंगे। खास बात यह कि प्रतिमा अनावरण के दिन बच्चन ने हनुमान जयंती का व्रत भी रखा था। वह अपनी बहन श्वेता बच्चन नंदा के साथ समारोह में पहुंचे थे।
बच्चन ने कहा कि हनुमान ही एक मात्र ऐसे देवता हैं, जो सतयुग, द्वापर, त्रेता युग से लेकर कलयुग तक में सर्वव्यापी हैं। जेएचएस स्वेंडगार्ड लैबोरेटरीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक निखिल नंदा ने कहा कि इस प्रतिमा की स्थापना हनुमान की प्रेरणा से ही सम्भव हो पाई है।
उन्होने बताया कि दो वर्ष पहले 26 अक्टूबर, 2008 को उन्होंने इस कार्य का संकल्प लिया था। राजस्थान में पिलानी निवासी मूर्तिकार मातुराम वर्मा ने अपने अथक प्रयासों से इस प्रतिमा को तैयार किया है।
जाखू मंदिर शिमला के सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। यह स्थल 8,500 फुट की ऊंचाई पर है। मान्यता के अनुसार यह स्थल रामायण काल से जुड़ा हुआ है।
मान्यता है कि जब राम-रावण युद्ध के दौरान रावण के बेटे मेघनाद ने लक्ष्मण जी को शक्ति बाण मार दिया था और वह मुर्छित हो गए थे, और उसके बाद हनुमान संजीवनी बूटी लेने हिमालय की गए थे तो वह जाखू पर्वत पर उतरे थे।
दरअसल, हनुमान संजीवनी बूटी से अनभिज्ञ थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि याकू ऋषि तपस्या कर रहे थे। याकू ऋषि के नाम पर ही इस पर्वत का नाम जाखू पड़ गया है। हनुमान बूटी की जानकारी के लिए याकू ऋषि से मिलने उस पर्वत पर उतर गए। बताते हैं कि इस पर्वत की ऊंचाई और अधिक थी, लेकिन हनुमान के उतरते ही उनके भार से पर्वत का काफी हिस्सा पृथ्वी में धंस गया।
इस पर्वत पर वानरों की बड़ी आबादी थी। हनुमान को देखकर सारे वानर उनके पास आ गए थे और उनके साथ जाने के लिए आतुर हो उठे थे। लेकिन हनुमान ने ध्यान के जरिए उन सभी को नीद में सुला दिया था। जब वानर जागे तो हनुमान वहां से जा चुके थे। लौकिक मान्यता है कि जो वानर अभी उस पर्वत पर हैं, वे उसी खानदान के हैं, जिन्होंने हनुमान का साक्षात्कार किया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटकों की बढ़ रही भीड़ के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा है। इस कारण जाखू पर्वत पर वानरों की संख्या काफी कम हो गई है। लोग आशंका जताते हैं कि जिस तरह से जाखू पर्वत के आसपास का पर्यावरण नष्ट हो रहा है, कुछ वर्षो में वानरों की आबादी बिल्कुल खत्म हो जाने का खतरा है।
इस बारे में मुख्यमंत्री धूमल ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के पर्यावरण को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के अभियान शुरू किए गए हैं। स्कूलों में बच्चे अपनी कक्षाओं की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ करते हैं। लेकिन धूमल ने ग्लोबल वार्मिग को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस समस्या ने हिमाचल प्रदेश को भी प्रभावित किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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