बांग्लादेश में बंद के दौरान छिटपुट हिंसा (लीड-1)

ढाका, 14 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को उनके सरकारी आवास से बेदखल किए जाने के खिलाफ रविवार को आयोजित दिन भर के राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान हिंसा की छिटपुट घटनाएं सामने आईं। खालिदा उस आवास में 1972 से निवास कर रही थीं।

समाचार पत्र 'द डेली स्टार' के अनुसार पूर्व मंत्री और बीएनपी की चटगांव इकाई के अध्यक्ष आमिर खसरू महमूद चौधरी दोपहर में पुलिस के साथ संघर्ष में घायल हो गए।

ऑनलाइन समाचार पत्र, बीडीन्यूज24डॉटकॉम ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी ढाका में पुलिस की एक गश्त पर पेट्रोल बम से हमला किया।

बीएनपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय के सामने एक जुलूस निकाला, परिणामस्वरूप भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा।

इस घटना के दौरान एक महिला कार्यकर्ता घायल हो गई।

बीएनपी के महासचिव खांडेकर दिलावर हुसैन ने कहा कि लोगों का सरकार से भरोसा उठ गया है और वे स्वेच्छया बंद में हिस्सा ले रहे हैं।

कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बीएनपी कार्यालय के चारों ओर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई थी। देश के अन्य हिस्सों में बंद शांतिपूर्ण रहा।

देश भर में सड़कों पर वाहन बहुत कम दिखाई दिए और सभी शिक्षण संस्थान बंद रहे।

बंद का आह्वान ढाका छावनी में स्थित एक मंजिला आवास से खालिदा को शनिवार को बेदखल किए जाने के खिलाफ किया गया है।

आवास का तकनीकी तौर पर स्वामित्व रखने वाली सेना ने कहा है कि खालिदा ने अपनी मर्जी से आवास खाली किया है, जबकि खालिदा की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का कहना है कि उन्हें बेदखल किया गया है।

सरकार ने यह कार्रवाई तब की है, जब ढाका उच्च न्यायालय ने खालिदा की उस याचिका को 12 अक्टूबर को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बेदखली की कार्रवाई रोकने की मांग की थी। अदालत ने खालिदा को आवास खाली करने के लिए एक महीने का नोटिस दिया था, जिसकी मियाद शुक्रवार को पूरी हो गई।

खालिदा ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है, जिस पर 29 नवम्बर को सुनवाई होनी है। उनके वकीलों ने शनिवार को दावा किया कि देश के प्रधान न्यायाधीश ने बेदखली के खिलाफ उन्हें आश्वासन दिया है।

खालिदा (64) ने नम आंखों से शनिवार की शाम अपने कार्यालय में मीडिया को बताया कि उन्हें उनके आवास से जबरन बाहर कर दिया गया। उन्हें कपड़े तक बदलने की मोहलत नहीं दी गई।

खालिदा ने कहा कि उस आवास में उनके पति और देश के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत जियाउर रहमान की स्मृतियां शेष हैं और उन्हें अपने निजी सामानों को भी लेने की अनुमति नहीं दी गई।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस घटना से खालिदा और उनकी धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच तकरार और बढ़ जाएगी।

युनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) ने खबर दी है कि खालिदा और उनके समर्थकों ने देश के व्यापारियों के उस निवेदन को नकार दिया है, जिसमें उन्होंने रविवार के बंद को वापस लेने का आग्रह किया था।

व्यापारियों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि नए निवेशक यहां निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं। "रविवार के बंद का निवेश पर नकारात्मक असर पड़ेगा।"

सरकार की ओर महान्यायवादी महबूबी आलम ने कहा कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए खालिदा के वकील ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपीली डिवीजन में स्थगन याचिका नहीं दाखिल की।

समाचार पत्र 'न्यू एज' ने आलम के हवाले से कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के नियमानुसार उच्च न्यायालय के फैसले को तब तक स्वत: स्थगित नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसमें मृत्युदंड शामिल न हो।

इस बीच कई हिंसक घटनाओं को इस विवाद से जोड़ा जाने लगा है।

कुश्तिया के दौलतपुर उप जिले में अवामी लीग के सांसद अफाज उद्दीन अहमद के आवास पर शनिवार रात एक आत्मघाती हमले में तीन व्यक्तियों की मौत हो गई और दो घायल हो गए।

अवामी लीग ने कहा है कि बीएनपी के कार्यकता और उसके इस्लामी सहयोगी जमात, इस हमले में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि हमला खालिदा को बेदखल किए जाने के ठीक बाद हुआ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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