सू ची रिहा, भारत सहित पश्चिमी देशों ने किया स्वागत (राउंडअप)

सैन्य शासन ने शनिवार शाम 5.30 बजे सू ची को उनके घर की नजरबंदी से रिहा किया। इस मौके पर हजारों की संख्या में उनकी पार्टी 'नेशनल लीग फार डेमोक्रेसी' (एनएलडी) के समर्थक और पत्रकार मौजूद थे।

रिहाई के बाद अपने घर से बाहर निकलीं सू ची खुश दिख रही थीं। इस मौके पर समर्थक भावुक हो उठे। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए सू ची ने कहा, "मैं आप सभी से मिलकर बहुत खुश हूं। मैं चाहती हूं कि आप अपनी आवाज उचित समय पर उठाएं।"

शांति के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाली लोकतंत्र समर्थक नेता ने अपने पिछले 20 वर्षो में से 15 वर्ष नजरबंदी में बिताए हैं।

समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करने के बाद सू ची ने अपने आवास के परिसर में देश की मुख्य विपक्षी पार्टी एनएलडी की कार्यकारी समिति के साथ बैठक की।

सू ची को न्यायालय द्वारा जुलाई 2009 में 18 महीने की नजरबंदी की सजा सुनाई गई थी। उन्हें एक अमेरिकी नागरिक को झील के किनारे स्थित अपने आवास में तैर कर आने की अनुमति देकर कैद की शर्ते तोड़ने का दोषी ठहराया गया था। गत 13 मई 2009 को शुरू हुई यह सजा शनिवार को खत्म हो गई।

म्यांमार के स्वतंत्रता के नायक आंग सान की पुत्री सू ची (65) की रिहाई सैन्य शासन के वरिष्ठ जनरल थान श्वे ने की है।

उधर, सू ची की रिहाई के साथ ही इस बात पर संदेह उठने लगा है कि सैन्य शासन सू ची को ज्यादा दिनों तक आजादी देगा, क्योंकि वह हमेशा उनकी सत्ता को चुनौती पेश करेंगी। म्यांमार में पिछले 20 सालों में पहली बार गत सात नवंबर को चुनाव हुए हैं।

चुनाव के जो प्रारंभिक नतीजे मिले हैं उनमें 'यूनियन सालिडरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी' (यूएसडीपी) जो सैन्य शासन का छद्म रूप है, उसने बहुमत से जीत दर्ज की है।

राजनीतिक विश्लेषक मांग जर्नी के मुताबिक, "सैन्य प्रशासन का सोचना है कि सू ची उसकी सत्ता को चुनौती पेश करने की स्थिति में नहीं हैं।"

उन्होंने कहा कि अपनी जीत के बाद सैन्य शासन सू ची के साथ शायद ही राजनीतिक वार्ता शुरू करने की सोचेगा।

भारत ने लोकतंत्र की समर्थक नेता आंग सान सू ची की रिहाई का स्वागत किया है। विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने कहा, "मुझे पता है कि म्यांमार के शासन ने आंग सान सू ची को रिहा किया है। भारत की सरकार उनकी रिहाई का स्वागत करती है। म्यांमार के नजदीकी पड़ोसी के रूप में हमें विश्वास है कि इससे म्यांमार में राजनीतिक बदलाव में मदद मिलेगी।"

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा, "आंग सान सू ची की अन्याय का सामना करने की गरिमा और साहस विश्व भर के लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।"

सू ची को पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है। इन देशों का कहना है कि म्यांमार में हाल में संपन्न चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से नहीं हुए हैं। उन्होंने यूएसडीपी पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं। सैन्य शासन ने सू ची की पार्टी एनएलडी को चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी।

इन चुनावों पर जर्नी ने कहा, "सैनिक शासन भले ही चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) को सू ची को रिहा कर उनके साथ काम करने का संदेश दे रहा हो, लेकिन वह पश्चिमी देशों को मूर्ख नहीं बना पाएगा।"

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सू ची की रिहाई का स्वागत किया है। उन्होंने वहां जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग करते हुए कहा, "वह मेरे लिए एक नायक और विश्व एवं म्यांमार में मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।"

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा, "आंग सान सू ची उन सभी के लिए प्रेरणा की स्रोत हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों में विश्वास करते हैं।"

इंडो एशियन न्यूज सर्विस।

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