'माधवन भी नाखुश थीं 2-जी स्पेक्ट्रम बिक्री प्रक्रिया से'

पूर्व दूरसंचार सचिव ने आईएएनएस से कहा कि दूरसंचार आयोग की तत्कालीन सदस्य सचिव (वित्त) मंजू माधवन ने भी इस प्रक्रिया से नाखुश होने के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

सितम्बर-अक्टूबर 2007 में दूरसंचार मंत्रालय ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन मंगाए थे। इसमें 500 लाइसेंस के लिए 580 आवेदन प्राप्त हुए थे लेकिन राजा ने स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए कोई नीति निर्देश जारी नहीं किए।

माथुर ने कहा, "मैंने शुरू से ही इसका विरोध किया। 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन मांगे गए लेकिन इनके वितरण के लिए कोई नीति-निर्देश जारी नहीं किए गए। इसका विरोध करने वाला मैं अकेला नहीं था।"

"जब 31 अक्टूबर 2007 को मैं सेवानिवृत्त हुआ तब मंजू माधवन ने भी कुछ ही महीनों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इससे साबित होता है कि वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं थीं।"

पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी माथुर ने सेवानिवृत्ति से पहले दो साल तक दूरसंचार सचिव के रूप में काम किया। उन्होंने राजा के साथ चार महीने काम किया।

उन्होंने कहा, "उस समय, उन्हें (राजा)के पास प्रौद्योगिकी आधारित मंत्रालय को चलाने का नजरिया नहीं था।" उन्होंने कहा कि हालांकि उनके पूर्व कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि राजा अब चीजों को पहले से बेहतर तरीके से नियंत्रित कर रहे हैं।

माथुर ने कहा, "सचिव के रूप में मेरे दो साल के कार्यकाल में कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ।"

माथुर ने कहा कि यदि कोई भी जांच एजेंसी जांच के लिए उनसे संपर्क करती है तो वह पूरा सहयोग करेंगे।

वर्ष 2008 में 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में राजा की भूमिका को लेकर विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस आवंटन से देश को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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