प्रदर्शनों के बीच खालिदा से आवास खाली कराया (लीड-4)
वेबसाइट 'बीडीन्यूज24 डॉट कॉम' के अनुसार खालिदा के प्रवक्ता मारूफ कमल खान ने बताया कि बीएनपी नेताओं ने सरकारी आदेश पर आवास खाली करा रहे अधिकारियों से मुख्य विपक्षी पार्टी की मुखिया को पार्टी कार्यालय ले जाने की मांग की।
इसके पहले बीएनपी ने दावा किया कि देश के प्रधान न्यायाधीश ने आश्वासन दिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को उनके सरकारी आवास से तब तक बेदखल नहीं किया जाएगा, जब तक कि सर्वोच्च न्यायालय छावनी इलाके स्थित आवास में तीन दशकों से अधिक समय से रहने वालीं खालिदा के मामले में कोई निर्णय नहीं ले लेता।
2.72 एकड़ का यह परिसर मूल रूप से सेना के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ का सरकारी आवास था। खालिदा के पति जनरल जियाउर रहमान किसी समय इस पद पर थे, बाद में वह सेना प्रमुख बन गए थे। उसके बाद वह सैन्य शासक और फिर निर्वाचित राष्ट्रपति भी बने। वर्ष 1981 में उनकी हत्या कर दी गई।
शेख हसीना सरकार ने ढाका उच्च न्यायालय को बताया है कि आवास का आवंटन अवैध था और इसे खाली कराया जाना चाहिए।
प्रशासन ने शनिवार को जैसे ही बेदखली की प्रक्रिया शुरू की, खालिदा के वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, ए.बी.एम.खरुल हक से उनके सरकारी आवास पर जाकर मुलाकात की।
प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात के बाद बाहर निकले खालिदा के वकील रफीक-उल-हक ने संवाददाताओं को बताया, "हमें आश्वासन मिला है और हम मानते हैं कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ 29 नवम्बर को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होने तक सरकार खालिदा को घर से बाहर करने का कोई कदम नहीं उठाएगी।"
'युनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश' (यूएनबी) के अनुसार एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व कानून मंत्री, मौदूद अहमद ने कहा कि उन्होंने खालिदा से बात की है और उनके अपना आवास खाली करने का सवाल ही नहीं उठता।
बहरहाल, इस बारे में न तो सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कुछ कहा गया है, और न सरकार की ओर से ही कि शनिवार तड़के शुरू हुई बेदखली की प्रक्रिया जारी रहेगी या नहीं।
सरकार ने यह कदम, ढाका उच्च न्यायालय द्वारा खालिदा को अवास खाली करने के लिए एक महीने के नोटिस की मियाद पूरी हो जाने के बाद उठाया है। उच्च न्यायालय ने बेदखली आदेश के खिलाफ खालिदा की याचिका खारिज कर दी थी।
खालिदा ने उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां मामले की सुनवाई 29 नवम्बर तक स्थगित है।
बीएनपी कार्यकर्ता सरकार के इस कदम के विरोध में आक्रामक हो उठे और उन्होंने सड़क जाम कर दीं और विरोध प्रदर्शन किए। पार्टी ने रविवार को देशव्यापी हड़ताल करने का आह्वान किया है। हड़ताल के मद्देनजर सरकार ने सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है।
पुलिस और रैपिड एक्सन बटालियन के जवानों ने जैसे ही शनिवार को आवास खाली कराना शुरू किया, उसी समय बीएनपी के महासचिव खांडेकर दिलावर हुसैन ने कहा कि खालिदा को 'नजरबंद' कर दिया गया है।
समाचार पत्र 'डेली स्टार' के मुताबिक खालिदा के प्रेस सचिव और बीनएपी के अन्य नेताओं ने उन खबरों से इंकार किया, जिनमें कहा गया है कि वह अपनी मर्जी से आवास खाली कर रही हैं।
इस बीच राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरकार के इस कदम से खालिदा और उनकी धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, हसीना के बीच विवाद और बढ़ जाएगा।
दिसम्बर 2008 में हसीना के हाथों संसदीय चुनाव में पराजित हो चुकीं खालिदा संसद का बहिष्कार कर रही हैं।
सरकार खालिदा के दो बेटों तारिक रहमान और अराफात रहमान कोको को स्वदेश वापस लाने के लिए प्रयास कर रही है। दोनों भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में कैद थे, लेकिन पिछली सरकार ने दोनों को लंदन और बैंकाक में अलग-अलग इलाज कराने के लिए जमानत पर रिहा कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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