'कभी सू ची का घर था कांग्रेस मुख्यालय'
सू ची जब 15 साल की थीं तब वह राजधानी के 24 अकबर रोड में रहती थीं जो कि उनकी मां दाव किन ची को आवंटित किया गया था। वह भारत में म्यांमार की राजदूत थीं।
लेखक-पत्रकार रशीद किदवई की नई किताब '24 अकबर रोड' में वर्ष 1961 के बाद से इस बंगले के इतिहास का उल्लेख किया गया है।
वर्ष 1911 से 1925 के बीच बनाए गए इस बंगले को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दाव किन ची के सम्मान में 'बर्मा हाउस' नाम दिया था।
जल्द ही जारी होने जा रही इस किताब में किदवई ने लिखा, "सू (ची) ने अपने बचपन में अपने लिए जिस कमरे को चुना था वह अब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का कमरा है।"
सू ने इस कमरे को इसलिए चुना था क्योंकि इसमें एक बड़ा पियानो था। हर शाम को पियानो टीचर उन्हें इसे बजाना सिखाता था। उनमें जल्द ही पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को सीखने की रुचि पैदा हो गई थी।
कुछ साल बाद जब रंगून में उन्हें झील के किनारे स्थित एक जीर्ण मकान में नजरबंद किया गया तब पियानो के प्रति सू ची के प्रेम ने उन्हें बड़ी राहत दी। नजरबंदी के समय वह अवसाद से बचने के लिए कई-कई घंटों तक पियानो बजाती थीं।
किदवई ने लिखा कि 24 अकबर रोड में ही सू ची ने जापानी तरीके से फूलों को सजाना सीखा था। यहां के बगीचे में वह संजय गांधी और राजीव गांधी के साथ खेलती थीं।
"संजय और राजीव गांधी उनके समकालीन थे। एक का जन्म सू की से एक साल पहले और दूसरे का उनसे एक साल बाद हुआ था। वह अक्सर राष्ट्रपति भवन में दोनों के साथ देखी जातीं थीं जहां वह राष्ट्रपति के अंगरक्षकों से सवारी करना सीखती थीं।"
सू ची ने अपनी स्कूल की पढ़ाई दिल्ली स्थित सेंट जोसेफ गिरजाघर के पास स्थित जीसस एण्ड मैरी कान्वेंट स्कूल से की।
सू ने इसके बाद लेडी श्रीराम कॉलेज (एलएसआर) से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया।
वर्ष 1962 में अब दिल्ली का यह प्रसिद्ध कॉलेज केवल छह साल पुराना था और यह दरियागंज में स्थित था। इसमें तब केवल 300 छात्र थे।
किताब के मुताबिक इंदिरा गांधी 1778 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद पहली बार 24 अकबर रोड पहुंची थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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