मप्र में नवजातों को संकट से उबारने की जुगत (बाल दिवस पर विशेष)

भोपाल, 13 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में एक हजार नवजात शिशुओं में से 70 की मौत एक साल के भीतर ही हो जाती है। यह आंकड़ा देश में अपने आप में एक रिकार्ड है। नवजात शिशुओं को संकट के इस दौर से उबारने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने कई कारगर कदम उठाए हैं जिनके नतीजों का इंतजार है।

भारत सरकार के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के मुताबिक देश में जन्म लेने के एक साल के भीतर ही हजार में से 45 नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है, जबकि मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 70 है, जो देश में सबसे ज्यादा है। इनमें से दो तिहाई बच्चे जन्म के 28 दिन के भीतर ही दुनिया से विदा ले लेते हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। इसकी वजह संस्थागत प्रसव की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव माना जाता है।

हालात से निपटने के लिए सरकार ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना शुरू की है, वहीं नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से स्पेशल न्यूलीबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) स्थापित करने की योजना बनाई है। एक इकाई पर लगभग 40 से 45 लाख रुपये का व्यय आता है।

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव एस. आर. मोहंती का कहना है कि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर पर काबू पाने का प्रयास जारी है। प्रदेश के सभी 50 जिलों में एसएससीयू की स्थापना की जानी है। अब तक 29 जिलों में ये इकाइयां बन चुकी हैं। इससे नवजात शिशु मृत्यु दर पर कितना काबू पाया जा सका है, इसका खुलासा भारत सरकार के आंकड़े से ही हो पाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब से 10 साल पहले तक संस्थागत प्रसव का औसत 45 फीसदी था, जो अब 81 प्रतिशत तक पहुंच गया है। संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए महिला को 1400 रुपये दिए जाते हैं। इसके साथ ही कॉल सेंटर भी स्थापित किए गए हैं, जहां फोन करने पर जननी वाहन गर्भवती महिला के घर भेजा जाता है।

यूनिसेफ की मध्य प्रदेश इकाई के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. गगन गुप्ता का कहना है कि शिशु को जन्म के बाद बेहतर सुविधा देने के लिए स्थापित की गई इकाइयां काफी कारगर साबित हो रही हैं। अनुमान के मुताबिक दो वर्षो में इन इकाइयों ने अब तक 30 हजार बच्चों की प्राण रक्षा की है।

प्रदेश में स्थापित की जा रही एसएनसीयू के सार्थक नतीजे नजर आ रहे हैं और यही कारण है कि तामिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं छत्तीसगढ़ के दल इन इकाइयों का जायजा लेने मध्य प्रदेश आ चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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