खालिदा मामले में बीएनपी को मिला आश्वासन (लीड-3)

ढाका, 13 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने शनिवार को दावा किया कि देश के प्रधान न्यायाधीश ने आश्वासन दिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को उनके सरकारी आवास से तब तक बेदखल नहीं किया जाएगा, जब तक कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर कोई निर्णय नहीं ले लेता।

बीएनपी कार्यकर्ता सरकार के इस कदम के विरोध में आक्रामक हो उठे और उन्होंने सड़क जाम कर दीं और विरोध प्रदर्शन किए। बीएनपी ने रविवार को राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। इस मद्देनजर प्रमुख स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

यह विवाद ढाका छावनी इलाके में स्थित खालिदा के एक मंजिला आवास को लेकर है। इसमें वह पिछले तीन दशकों से निवास कर रही हैं। खालिदा को यह आवास 1981 में उनके पति की हत्या के बाद प्रदान किया गया था।

पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन के जवानों ने ढाका छावनी क्षेत्र में स्थित इस एक मंजिला आवास को अपने कब्जे में ले लिया।

2.72 एकड़ का यह परिसर मूल रूप से सेना के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ का सरकारी आवास था। खालिदा के पति जनरल जियाउर रहमान किसी समय इस पद पर थे, बाद में वह सेना प्रमुख बन गए थे। उसके बाद वह सैन्य शासक और फिर निर्वाचित राष्ट्रपति भी बने। वर्ष 1981 में उनकी हत्या कर दी गई।

शेख हसीना सरकार ने ढाका उच्च न्यायालय को बताया है कि आवास का आवंटन अवैध था और इसे खाली कराया जाना चाहिए।

हसीना, इस आवास का इस्तेमाल उन सैन्य अधिकारियों के परिवारों के पुनर्वास के लिए करना चाहती हैं, जो फरवरी 2009 में बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) के जवानों द्वारा की गई बगावत में मारे गए थे।

प्रशासन ने शनिवार को जैसे ही बेदखली की प्रक्रिया शुरू की, खालिदा के वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, ए.बी.एम.खरुल हक से उनके सरकारी आवास पर जाकर मुलाकात की।

प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात के बाद बाहर निकले खालिदा के वकील रफीक-उल-हक ने संवाददाताओं को बताया, "हमें आश्वासन मिला है और हम मानते हैं कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ 29 नवम्बर को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होने तक सरकार खालिदा को घर से बाहर करने का कोई कदम नहीं उठाएगी।"

युनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) ने खबर दी है कि एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व कानून मंत्री, मौदूद अहमद ने कहा कि उन्होंने खालिदा से बात की है और उनके अपना आवास खाली करने का सवाल ही नहीं उठता।

बहरहाल, इस बारे में न तो सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कुछ कहा गया है, और न सरकार की ओर से ही कि शनिवार तड़के शुरू हुई बेदखली की प्रक्रिया जारी रहेगी या नहीं।

इस बीच बीएनपी द्वारा शनिवार को बुलाई गई आपातकालीन बैठक के पूर्व पार्टी महासचिव खांडेकर दिलावर हुसैन ने कहा कि खालिदा को नजरबंद कर दिया गया है और वह अभी भी अपने घर में मौजूद हैं।

सरकार ने यह कदम, ढाका उच्च न्यायालय द्वारा खालिदा को अवास खाली करने के लिए एक महीने के नोटिस की मियाद पूरी हो जाने के बाद उठाया है। उच्च न्यायालय ने बेदखली आदेश के खिलाफ खालिदा की याचिका खारिज कर दी थी, और आवास खाली करने के लिए 12 नवम्बर की समय सीमा निर्धारित कर दी थी।

खालिदा ने उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां मामले की सुनवाई 29 नवम्बर तक स्थगित है।

समाचार पत्र 'डेली स्टार' ने कहा है कि खालिदा के प्रेस सचिव और बीनएपी के अन्य नेताओं ने उन खबरों से इंकार किया, जिनमें कहा गया है कि वह अपनी मर्जी से आवास खाली कर रही हैं, जैसा कि सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है।

खालिदा के प्रेस सचिव मारुफ कमाल खान ने इंटर सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) विभाग द्वारा जारी बयान में किए गए दावे के बारे में बताया कि "यह झूठ है और इसके पीछे लोगों को भ्रमित करने का गलत इरादा है।"

खान ने कहा, "खालिदा जिया अपनी मर्जी से घर नहीं खाली कर रही हैं।"

इस आवास पर दावा, इंटर सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) विभाग की ओर से जारी एक बयान के जरिए सेना ने किया है। तकनीकी रूप से छावनी क्षेत्र में आने वाले इस आवास पर सेना का अधिकार है।

इस बीच अवामी लीग ने खालिदा द्वारा आवास खाली किए जाने सम्बंधी खबर का स्वागत किया है।

अवामी लीग के केंद्रीय संयुक्त सचिव महबूब-उल-आलम हनीफ ने डेली स्टार को बताया कि "विपक्षी नेता का यह एक समझदारी पूर्ण निर्णय है, जो देश में शिष्टता लाएगा और कानून के शासन को मजबूती प्रदान करेगा।"

हनीफ ने कहा, "इस मामले में सरकार या सत्ताधारी पार्टी शामिल नहीं है।"

वैबसाइट 'बीडी न्यूज 24 डॉट कॉम' ने खबर दी है कि सरकार के इस कदम का अनुमान लगाते हुए बीएनपी के कार्यकर्ता छावनी के जहांगीर गेट पर इकट्ठा हो गए थे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

इस बीच राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरकार के इस कदम से खालिदा और उनकी धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, हसीना के बीच विवाद और बढ़ जाएगा।

दिसम्बर 2008 में हसीना के हाथों संसदीय चुनाव में पराजित हो चुकीं खालिदा संसद का बहिष्कार कर रही हैं।

सरकार खालिदा के दो बेटों तारिक रहमान और अराफात रहमान कोको को स्वदेश वापस लाने के लिए प्रयास कर रही है। दोनों भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में कैद थे, लेकिन पिछली सरकार ने दोनों को लंदन और बैंकाक में अलग-अलग इलाज कराने के लिए जमानत पर रिहा कर दिया था।

'डेली स्टार' ने बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) महबूबुर रहमान के हवाले से कहा है, "जो भी करना था, उसे एक सम्मानजनक तरीके से किया जाना चाहिए था, ताकि कोई बुरा उदाहरण न तैयार होता।"

खालिदा के घर की देखरेख करने वाले एक व्यक्ति ने समाचार पत्र 'ऑनलाइन' की वेबसाइट, 'बीडी न्यूज 24 डॉट कॉम' को बताया कि सुरक्षा कर्मियों ने सुबह लगभग 8.30 बजे घर में दाखिल होकर आंगन और छत पर मोर्चा संभाल लिया। उसने बताया, "मैडम (खालिदा) उठ चुकी थीं। वह अपने कमरे में थीं"

एक अन्य शख्स ने बताया कि सुरक्षा बलों ने शनिवार सुबह लगभग 6.30 बजे से ही परिसर के सामने मोर्चा लेना शुरू कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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