'न्यायाधीशों की नियुक्ति में पारदर्शिता का अभाव'
शाह ने कहा, "हमारी वर्तमान नियुक्ति प्रणाली में लोकतांत्रिक संस्कृति का अभाव है, क्योंकि इसमें न तो पारदर्शिता है और न तो इसमें निरीक्षण की ही व्यवस्था है।"
अपने चर्चित फैसलों के लिए चर्चित शाह, यहां आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे। संगोष्ठी का शीर्षक था : 'स्ट्रेंथनिंग डेमोक्रेसी : रोल ऑफ जुडिसियरी'।
शाह ने कहा, "फिलहाल न्यायाधीशों का चयन व्यापक तौर पर अज्ञात स्थितियों में गोपनीय मापदंड के आधार पर किया जाता है। यह पद्यति लोकतांत्रिक गिरावट को जाहिर करती है।"
शाह ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय सम्मति, उच्च न्यायालयों में स्वतंत्र आयोग के जरिए न्यायाधीशों की नियुक्तियों का समर्थन करती है। पीठ पर अधिक विविधता बनाए रखने के लिए भी सहमति होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि महिला न्यायाधीशों की संख्या पांच प्रतिशत से भी कम है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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