साध्य बीमारियां से 14 लाख बच्चों की मौत

एक ऑनलाइन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, "भारत में ज्यादातर मौतें घरों पर बिना इलाज के ही हो जाती हैं। इनके कारणों को दूर किया जा सकता है। साल 2005 में देश में करीब 15 लाख बच्चों की मौतें जिन पांच बीमारियों की वजह से हुईं उनका इलाज सम्भव था।"

बच्चों की मौत का कारण निमोनिया, अतिसार जैसी बीमारियां और जन्म के समय होने वाली परेशानियां जैसे वजन कम होना, श्वसन सम्बंधी परेशानी और संक्रमण हैं।

'रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया' (आरजीआई), 'सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च' (सीजीएचआर) और दुनियाभर के सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से यह अध्ययन किया था।

इस अध्ययन में देश के 63 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। घरेलू जांच, सर्वेक्षणों और आरजीआई की अस्पताल आधारित पंजीकरण प्रणाली के जरिए यह अध्ययन किया गया था।

लिंग और क्षेत्र के आधार पर बाल मृत्युदर में भी अंतर देखा गया था।

अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मध्य भारत की एक से 59 महीने की बच्चियों की निमोनिया से होने वाली मृत्युदर (प्रति 1,000 जन्मों पर) दक्षिण भारत के लड़कों की तुलना में पांच गुना ज्यादा थी।

अध्ययन में कहा गया है कि भारत में जन्म के समय होने वाली मौतों की वजहें श्वसन में परेशानी, जन्म के समय बच्चों को लगने वाली शारीरिक चोट, रोगाणुओं का संक्रमण और टिटनेस हैं।

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में भारत में करीब 23.5 लाख बच्चों की मौत हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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