लीवर का हिस्सा दान कर बचाई पति की जिंदगी

राजधानी से लगे गुड़गांव के 'मेदांता-द मेडीसिटी अस्पताल' में इलाज के लिए पहुंचे करन सिंह लीवर की गम्भीर बीमारी से पीड़ित थे और उनकी जान बचाने के लिए तुरंत लीवर प्रत्यारोपण करना आवश्यक था।

'इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर ट्रांस्प्लानटेशन एंड रीजेनरेटिव मेडीसिन' के प्रमुख व मुख्य प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सक डॉ ए.एस. सोएन ने बताया, "यह प्रत्यारोपण क्रिया अनूठी थी क्योंकि दाता के दिल में एक बड़ा सा छेद था। प्रत्यारोपण से पहले किए गए उनके स्वास्थ्य के परीक्षण में यह बात सामने आई थी। इसे देखते हुए शुरू में तो उन्हें लीवर दाता स्वीकार करने से इंकार कर दिया गया क्योंकि वह इसके लिए की जाने वाली शल्य चिकित्सा को नहीं झेल सकती थीं।"

मेदांता के डॉ. नरेश त्रेहान कहते हैं कि दिल के छेद की शल्य चिकित्सा असामान्य नहीं है लेकिन हमें पहली बार दाता के लीवर का एक हिस्सा निकालने की शल्य चिकित्सा से पहले ऐसा करना पड़ा था।

डॉ. संजीव सहगल ने बताया कि मरीज के परिवार के अन्य सदस्यों की भी लीवर दाता के लिए जांच की गई लेकिन वे इसके लिए ठीक नहीं थे। तब मरीज की पत्नी के सामने पहले दिल की शल्य चिकित्सा कराने और फिर इसके दो-तीन सप्ताह बाद लीवर दाता की शल्य चिकित्सा कराने का प्रस्ताव रखा गया। वैसे इन दोनों ही चिकित्साओं में जोखिम था लेकिन वह इसके लिए तैयार हो गईं।

ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल भान ने बताया कि दिल का छेद भरे जाने के बाद दाता के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और वह दो-तीन सप्ताह बाद दूसरी शल्य चिकित्सा के लिए तैयार थीं।

प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा के बाद लीवर दाता और उनके पति के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। पत्नी को अस्पताल से एक सप्ताह में छुट्टी मिल गई जबकि उनके पति दो सप्ताह बाद घर जा सके। अब दोनों ही स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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