मानसून की भविष्यवाणी के लिए भारत - अमरिका में समझौता

वाशिंगटन, 13 नवंबर (आईएएनएस)। मानसून की बेहतर भविष्यवाणी के लिए भारत और अमेरिका ने हाथ मिलाया है।

अमेरिका के 'राष्ट्रीय समुद्रीय एवं वातावरणीय प्रशासन' (एनओएए) और भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बीच यह समझौता हुआ है। यह समझौता खाद्य सुरक्षा समझौतों की उस श्रृंखला का हिस्सा है जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान पर अंतिम रूप दिया गया।

एनओएए के प्रशासक जेन लुबचेंको ने कहा कि इस 'मानसून समझौते' से लंबी अवधि के लिए मानसून की भविष्यवाणी की जा सकेगी। इससे भारत, अमेरिका और दूसरे कई देशों को मौसम की बेहतर भविष्यवाणी करने में मदद मिलेगी।

भारत में मानसून के कारण मोटे तौर पर छह महीने बारिश होती है, लेकिन इसकी शुरूआत और इसके प्रस्थान के समय और इसकी मजबूती का सटीक पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है। ये सूचनाएं खेती के लिए बड़े काम की होती हैं।

इसके अलावा एशिया-प्रशांत महासागर क्षेत्र का यह मानसून पूरी दुनिया को प्रभावित करता है।

समझौते के तहत मैरीलैड के कैंप स्प्रिंग्स में 'नेशनल सेंटर फॉर एनवॉरमेंट प्रीडिक्सन' में मानसून के पूर्वानुमान के लिए एक डेस्क स्थापित किया जाएगा। यह संगठन एनओएए का ही हिस्सा है।

भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और एनओएए के वैज्ञानिक जलवायु पूर्वानुमान पद्धति (सीएफएस) में सुधार के लिए सूचना और कौशल की साझेदारी करेंगे, जिससे लंबे समय के लिए मानसून का पूर्वानुमान लगाया जा सके।

इस समझौते से दक्षिण-पश्चिम अमेरिका में भी मानसून का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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