सरकारी आवास से बेदखल की गईं खालिदा (लीड-1)
यह आवास उन्हें 1981 में उनके पति की हत्या के बाद प्रदान किया गया था। शेख हसीना सरकार ने अदालत को बताया है कि यह आवंटन अवैध था।
समाचार पत्र 'द डेली स्टार' ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की स्थायी समिति के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) महबूबुर रहमान के हवाले से कहा है कि पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन के जवानों ने ढाका छावनी इलाके में स्थित खालिदा के आवास में प्रवेश कर उन्हें बाहर कर दिया।
पूर्व सेना प्रमुख रहमान ने कहा, "जो भी करना था, उसे एक सम्मानजनक तरीके से किया जाना चाहिए था, ताकि कोई बुरा उदाहरण न तैयार होता।"
खालिदा के घर की देखरेख करने वाले एक व्यक्ति ने समाचार पत्र 'ऑनलाइन' की वेबसाइट, 'बीडी न्यूज 24 डॉट कॉम' को बताया कि सुरक्षा कर्मियों ने सुबह लगभग 8.30 बजे घर में दाखिल होकर आंगन और छत पर मोर्चा संभाल लिया। उसने बताया, "मैडम (खालिदा) उठ चुकी थीं। वह अपने कमरे में थीं"
एक अन्य शख्स ने बताया कि सुरक्षा बलों ने शनिवार सुबह लगभग 6.30 बजे से ही परिसर के सामने मोर्चा लेना शुरू कर दिया।
सरकार ने यह कदम, इस आवास को लेकर कई महीनों से चल रही राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के बाद उठाया है। खालिदा को यह आवास, उनके पति व तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद जून 1981 में उपलब्ध कराया गया था।
खालिदा के पति द्वारा देश को दी गई सेवाओं के प्रति सम्मान में यह आवास प्रदान किया गया था। हसीना सरकार ने ढाका उच्च न्यायालय को बताया है कि आवास का आवंटन अवैध था और इसे खाली कराया जाना चाहिए।
हसीना ने कहा है कि वह इस आवास का इस्तेमाल उन सैन्य अधिकारियों के परिवारों के पुनर्वास के लिए करना चाहती हैं, जो फरवरी 2009 में बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) के जवानों द्वारा की गई बगावत में मारे गए थे।
उच्च न्यायालय की एक पीठ ने पिछले महीने बेदखली आदेश के खिलाफ दायर खालिदा की याचिका खारिज कर दी थी, और घर खाली करने के लिए 12 नवम्बर की समय सीमा निर्धारित कर दी थी।
खालिदा ने उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां मामले की सुनवाई 29 नवम्बर तक स्थगित है।
इस बीच राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरकार के इस कदम से खालिदा और उनकी धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच विवाद और बढ़ जाएगा।
खालिदा के एक सहयोगी ने कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री को जबरन घर से बाहर करना उचित नहीं होगा, क्योंकि उनकी याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय अपीली डिविजन में 29 नवम्बर को सुनावाई होनी है।"
खालिदा के एक अन्य सहयोगी ने उन खबरों से इंकार किया, जिनमें कहा गया है कि वह घर को अपनी मर्जी से छोड़ रही हैं, जैसा कि सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है।
खालिदा के प्रेस सचिव मारुफ कमाल खान ने इंटर सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) विभाग द्वारा जारी एक बयान में किए गए दावे के बारे में बताया कि "यह झूठ है और इसके पीछे लोगों को भ्रमित करने का गलत इरादा है।"
खान ने कहा, "खालिदा जिया अपनी मर्जी से घर नहीं खाली कर रही हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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