जलवायु परिवर्तन से घरेलू मोर्चे पर निपटना होगा : रमेश
रमेश 'नेशनल पॉलिसी डायलॉग ऑन क्लाइमेट चेंज एक्शन' विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सामुदायिक स्तर पर काम करने की जरूरत है न कि सरकारी स्तर पर।
उन्होंने मंत्रालय की एक पहल का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत आंध्र प्रदेश और केरल में कुछ स्वयंसहायता समूह की महिलाएं जलवायु परिवर्तन से निपटने के व्यावहारिक उपाय खोजने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान कर रही हैं।
रमेश ने कहा कि वे इस काम में सामाजिक संस्थाओं की भी मदद लेंगे।
उन्होंने कहा कि हम सोचते हैं कि जलवायु परिवर्तन के लिए हम जिम्मेदार नहीं है और दूसरों की ओर से पहल किए जाने के इंतजार में बैठे रहते हैं। जबकि जलवायु परिवर्तन से भारत अधिक प्रभावित होगा।
उन्होंने मानसून में होने वाले बदलाव, जल सुरक्षा, समुद्र का जलस्तर का बढ़ना, आदि कुछ ऐसे कारण बताए, जिसके कारण जलावायु परिवर्तन का भारत पर सबसे अधिक नकारात्मक असर पड़ सकता है।
मंत्रालय 16 नवंबर को जलवायु परिवर्तन पर एक रिपोर्ट जारी कर सकता है। इसमें भारत के चार क्षेत्रों -हिमालय, पश्चिमी घाट, तटवर्ती क्षेत्र और उत्तर पूर्व में कृषि, स्वास्थ्य, जल और वन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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