बोडो विद्रोहियों के खिलाफ चिदम्बरम का आक्रामक रुख (लीड-1)
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने एक बयान में कहा है, "सुरक्षा बलों को निर्देश दिया गया है कि वे हिंसा करने वालों के साथ कानून के तहत सख्ती से पेश आएं। एनडीएफबी के शांति वार्ता विरोधी धड़े के नेताओं को पकड़ा जाए और उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए।"
चिदम्बरम का यह बयान गुवाहाटी स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एकीकृत कमान मुख्यालय में उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद आया है। बैठक में राज्य के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई भी शामिल थे।
चिदम्बरम सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए शुक्रवार को गुवाहाटी पहुंचे। वहां एनडीएफबी के सिलसिलेवार हमलों में सोमवार से लेकर अब तक 24 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से अधिकांश हिंदीभाषी थे। हमलों में कम से कम 15 लोग घायल हैं।
बयान में कहा गया है, "एनडीएफबी के शांति वार्ता विराधी धड़े के जेल में बंद नेता रंजन दायमेरी अपने धड़े के आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना नहीं चाहते हैं।"
बैठक में शीर्ष सैन्य अधिकारी, अर्धसैनिक बलों के कमांडर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और नागरिक अधिकारी भी शामिल हुए।
बयान में कहा गया है, "इस संगठन के लिए एक ही रास्ता बचा है कि वह शांति वार्ता के लिए आगे आए। केंद्र एवं राज्य सरकार हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले किसी भी समूह के साथ वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन संगठन का कोई भी धड़ा यदि आपराधिक गतिविधि जारी रखेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
ज्ञात हो कि विद्रोही गुट ने गुरुवार को असम सरकार को फिर धमकी दी कि यदि सुरक्षा अभियान तुरंत बंद नहीं किए गए तो और भी हमले किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि एक नवंबर को एनडीएफबी ने धमकी दी थी कि सुरक्षा अभियानों के दौरान किसी मुठभेड़ में यदि उसका एक भी कैडर मारा गया तो 20 या अधिक लोग मार दिए जाएंगे। हाल में हुईं हत्याएं सोमवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एनडीएफबी के एक विद्रोही के मारे जाने के प्रतिशोध में की गईं।
केंद्रीय गृह मंत्री बैठक के बाद नई दिल्ली रवाना हो गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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