वैश्वीकरण को धार्मिक कट्टरवाद से खतरा : मेघनाद देसाई
नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में मौलाना अबुल कलाम आजाद मेमोरियल लेक्च र देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण की दिशा में हो रही प्रगति आर्थिक मंदी से निश्चित तौर पर बाधित हुई है। लेकिन आज इसके सामने खतरा कुछ और है। इस खतरे को आप विचारधारा कह सकते हैं, लेकिन इसमें धार्मिक कट्टरवाद, राष्ट्रीय और नस्लीय गौरव का भी मिश्रण है।
'वस्तुत: यह एक आतंकवाद है जिसने धर्म का चोला पहन लिया है और यही सबसे बड़ी बाधा है।'
देसाई पिछले छह साल में दूसरी बार यह व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण से जुड़े बहुत सारे विचारों में समय के साथ काफी बदलाव आ गया है।
उन्होंने कहा कि एक बड़ा सकारात्मक बदलाव विभिन्न देशों की संस्कृतियों का आपसी मिश्रण है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, रूस का बैले और अफ्रीकी-अमेरिकियों का हिप-हॉप आज दुनिया में हर जगह पहुंच गया है। और इसमें वीडियो, डीवीडी, टेलीविजन और इंटरनेट की बड़ी भूमिका रही है। पहली बार वैश्विक नागरिक संस्कृति का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने कहा, 'हालांकि वैश्वीकरण की इसी प्रक्रिया से दूसरी समस्या पैदा हो गई। इस्लामवाद ने उन्हीं उपकरणों का इस्तेमाल कर पश्चिमी देशों पर हमला करना शुरू कर दिया, जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को मजबूत बनाया था- इंटरनेट, मोबाइल फोन, दुनिया भर में आसान आवाजाही।'
देसाई ने कहा कि इस्लामवाद और इस्लाम एक-दूसरे से बिल्कुल अलग अवधारणा है। इस्लामवाद एक राजनीति अवधारणा है।
उन्होंने कहा कि इसके उलट मध्यमार्गी इस्लाम नहीं, बल्कि महानगरीय संस्कृति है, जो हर धर्म में समान रूप से फैला हुआ है और हर धर्म का आदर करता है। इसका शत्रु वैश्वीकृत दुनिया है, जिसमें धन, उपभोग की वस्तुएं और उन्मुक्त लोग हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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