मध्य प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय '27 रुपये'
भोपाल, 12 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में गरीबी मिटाने के सरकार चाहे जितने दावे करे, लेकिन हकीकत कुछ दूसरी है। गरीबी यहां तेजी से पैर पसार रही है। इसके गवाह आठ जिलों के लोग हैं, जिनकी प्रतिदिन आय मात्र 27 रुपये है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 वर्षो में वर्ष 1999-2000 के मुकाबले वर्ष 2008-09 में प्रतिव्यक्ति आय में प्रतिवर्ष 2534 रुपये का इजाफा हुआ है और यह आय 12384 से बढ़कर 14918 रुपये हो गई है। वहीं, दूसरी ओर आठ ऐसे जिले हैं, जहां प्रतिवर्ष आय का आंकड़ा 10 हजार रुपये से भी कम है।
प्रदेश में वर्ष 1999-2000 में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 12384 रुपये थी। उस समय राज्य के झाबुआ, बड़वानी और डिंडौरी जिले की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय 8400 रुपये थी। वहीं, 10 साल बाद इस श्रेणी में और आठ जिले शामिल हो गए हैं।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भिंड, श्योपुर कलां, शिवपुरी, टीकमगढ़, रीवा, पन्ना, बड़वानी और मंडला वे जिले हैं, जहां प्रति व्यक्ति वार्षिक औसत आय 10 हजार रुपये से भी कम है। इन इलाकों के लोगों की औसत आय प्रतिमाह 833 रुपये और प्रतिदिन 27 रुपये है।
सरकार हालांकि, गरीबी दूर करने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन गरीबी कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है।
प्रदेश के वित्त एवं सांख्यिकी मंत्री राघवजी का कहना है कि यदि प्रदेश के आठ जिले खतरे की श्रेणी में आए हैं तो ऐसा 10 वर्षो के आंकड़ों में आए बदलाव के चलते हुआ होगा।
वहीं, सांख्यिकी विभाग के आयुक्त एस.के. शर्मा का कहना है कि 10 साल पहले 8400 रुपये को प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय आधार बनाया गया था, जबकि इस बार 10 हजार रुपये को आधार बनाकर आठ जिलों को इस श्रेणी में रखा गया है। शर्मा का कहना है कि जो जिले इस श्रेणी में आए हैं, उनकी आय का मुख्य आधार कृषि है। खासकर बुंदेलखंड में पिछले पांच साल में सूखा पड़ा है, लिहाजा उस इलाके के जिले इसमें शामिल हैं।
भोजन का अधिकार अभियान की रोली शिवहरे का कहना है कि प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच लड़ाई में गरीब पिस रहे हैं। एम.सी. सक्सेना की रिपोर्ट भी बताती है कि प्रदेश में गरीबी बढ़ रही है। इसकी मूल वजह गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओ में व्याप्त भ्रष्टाचार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications