जी-20 सम्मेलन : प्रधानमंत्री का वैश्विक पुर्नसतुलन पर जोर (लीड-1)
यहां आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में मनमोहन सिंह कहा कि अमीर देशों से आने वाले कोष को गरीब और उभरती अर्थव्यवस्था वाले राष्ट्रों के बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास में लगाया जाना चाहिए ताकि अस्थिरता रोकी जा सके।
उन्होंने अमीर देशों में बेरोजगारी को लेकर संरक्षणवाद के विरुद्ध चेतावनी भी दी। उन्होंने जी-20 नेतृत्व से कहा कि पारस्परिक आकलन प्रक्रिया पर सहमति बनाई जाए, ताकि यह पता चल सके कि प्रत्येक देश के लिए किस स्तर तक घाटा या अधिक खर्च फायदेमंद या नुकसानदेह होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, "हम सबको अच्छी तरह मालूम है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में हम पुर्नसतुलन की समस्या से जूझ रहे हैं।"
उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह ने यहां गुरुवार से ही इथियोपियाई समकक्ष मेलेस जेनावी, मेक्सिको के राष्ट्रपति फेलिप काल्डेरोन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन एवं कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर सहित अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भागीदारी की।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, विदेश सचिव निरूपमा राव एवं वित्त सचिव अशोक चावला शामिल थे।
जी-20 का गठन 1999 में दक्षिण एशियाई देशों में आर्थिक संकट के बाद मूलत: वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों के स्तर पर किया गया था। बाद में वैश्विक वित्तीय संकट गहराने पर 2008 में इसका विस्तार करते हुए इसे विश्वस्तरीय मंच का स्वरूप दिया गया।
जी-20 समूह के देशों में भारत और दक्षिण कोरिया के अलावा ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन एवं यूरोपीय संघ शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications