इशरत मामला : विशेष जांच दल को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी (लीड-1)
राज्य के उच्च न्यायालय ने मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। गुजरात सरकार ने इसी फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति एस.एस. निज्जर की खण्डपीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने इस मामले को असाधारण बताया और कहा, "हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।"
ज्ञात हो कि गुजरात उच्च न्यायालय ने 24 सितम्बर, 2010 के अपने आदेश में इशरत जहां और तीन अन्य की 15 जून, 2004 को हुई हत्या की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
मारे गए अन्य तीन लोगों में जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, जीशान जौहर उर्फ अब्दुल गनी और अमजद अली उर्फ सलीम शामिल हैं। गनी और सलीम को जहां पाकिस्तानी नागरिक बताया गया था, वहीं गुजरात पुलिस ने दावा किया है कि चारों लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी थे।
राज्य सरकार की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सवाल किया कि किसी मुठभेड़ मामले की जांच के लिए कोई उच्च न्यायालय एसआईटी का गठन कैसे कर सकता है। रोहतगी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि उच्च न्यायालय द्वारा इस बार गठित किया गया एसआईटी उसके द्वारा 13 अगस्त, 2009 को गठित किए गए एसआईटी से किस मामले में बेहतर है।
गुजरात सरकार की ओर से ही पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि मुम्बई पुलिस द्वारा किए गए मुठभेड़ों के खिलाफ पीपुल्स युनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की ओर से दायर एक याचिका अभी तक लम्बित है।
याचिका मुठभेड़ सम्बंधी हत्याओं में जांच को लेकर दिशानिर्देश निर्धारित करने की मांग करती है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही केंद्र और राज्य सरकारों को इस मामले में नोटिस जारी कर चुका है।
राज्य सरकार ने कहा कि उच्च न्यायालय ने खुद के द्वारा 13 अगस्त, 2009 को गठित एसआईटी को भंग कर गलती की है। राज्य सरकार ने कहा है कि जांच दल को भंग करने के पीछे पूर्वाग्रह या पक्षपात का कोई आरोप नहीं था।
उच्च न्यायालय ने 12 अगस्त, 2010 के अपने आदेश में इशरत जहां मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी के पास भेज दी थी। इस एसआईटी का नेतृत्व सीबीआई के पूर्व निदेशक आर.के.राघवन कर रहे थे।
लेकिन इशरत जहां की मां ने उच्च न्यायालय के 12 अगस्त के फैसले की समीक्षा के लिए नौ सितम्बर को उच्च न्यायालय में फरियाद की। इस याचिका पर अदालत ने एक नए एसआईटी के गठन का 24 सितम्बर को आदेश दिया।
गुजरात पुलिस ने 15 जून, 2004 को इशरत और तीन अन्य लागों को कथित तौर पर मार गिराया था। पुलिस का दावा है कि मुम्बई की कॉलेज छात्रा इशरत का एक आतंकवादी संगठन से सम्बंध था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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