इस्तीफा नहीं दूंगा, न्यापालिका में पूरा विश्वास : राजा (लीड-2)
उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत के विचाराधीन है और न्यायपालिका के समक्ष सारी सच्चाई साबित कर दी जाएगी। राजा ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, "मुझे न्यायपालिका में पूरा विश्वास है। सारी चीजें न्यायपालिका पर निर्भर करती हैं। "
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर विपक्ष राजा के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इसी वजह से संसद के शीतकालीन सत्र के शुरुआती तीन दिनों में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।
इस्तीफे से जुड़े सवाल पर राजा ने कहा, " यह मामला अदालत के विचाराधीन है। हम अदालत में सबकुछ साबित कर देंगे। मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। हमने वर्ष 1999 की दूरंसचार नीति पर अमल करते हुए 2जी लाइंसेस दिए।"
राजा कांग्रेस की सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने वित्त और कानून मंत्रालय के सुझावों को ताक पर रखते हुए 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया। इससे सरकार को 170,000 करोड़ रुपये की चपत लगी।
इस मामले में गुरुवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की प्रमुख जे. जयललिता ने केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के सामने राजा को हटाने के बदले समर्थन का प्रस्ताव रखा था।
जयललिता के इस रुख पर राजा ने कहा कि इस मामले में एआईएडीएमके प्रमुख के बोलने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, "उनके पास इस मामले में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
इस कथित घोटाले का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर हुआ है। इस बारे में राजा ने कहा, "मैंने अब तक यह रिपोर्ट नहीं पढ़ी है। मैं मीडिया द्वारा पेश किए जा रहे तथ्यों पर टिप्पणी नहीं करूंगा।"
दूरसंचार विभाग की ओर से बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया गया था। इसमें कहा गया था कि 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन सरकारी नीति के मुताबिक किया गया। इस हलफनामे में यह भी कहा गया है कि कैग को सरकारी नीति पर सवाल खड़े करने का आधिकार नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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