'क्या प्रधानमंत्री नीलामी के बगैर 2जी आवंटन पर राजी थे?'
नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस पर डीएमके के सामने घुटने टेकने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछा कि क्या उनके कार्यालय ने बिना नीलामी के 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन करने की सहमति दी थी, जैसा कि दूरसंचार मंत्री ए.राजा ने कहा है।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने राजा को तत्काल बर्खास्त किए जाने की मांग की और कहा कि 2जी स्पेट्रम आवंटन पर सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में दिया गया हलफनामा सत्ता में बने रहने के लिए "डीएमके के समक्ष कांग्रेस द्वारा घुटने टेकने का एक स्पष्ट सबूत है।"
जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा, "देश में हुए इस बड़े घोटाले को लेकर राजा के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रधानमंत्री की अक्षमता ने साबित कर दिया है कि वह उस निर्णय में शामिल थे।"
प्रधानमंत्री से सवाल पूछते हुए जावड़ेकर ने कहा कि उन्हें इस प्रश्न का उत्तर हर हाल में देना चाहिए कि बिना नीलामी के 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन करने का निर्णय दूरसंचार विभाग द्वारा लिया गया था या कैबिनेट द्वारा।
जावड़ेकर ने कहा, "क्या यह सच नहीं है कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) की स्थिति के बारे में पूरी तरह वाकिफ नहीं थे और ट्राई ने बिना नीलामी के 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की सिफारिश कभी नहीं की थी?"
जावड़ेकर ने आगे कहा, "यदि नीलामी के बगैर 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन अपने आप में सही तरीका था, तो 3जी स्पेट्रम का आवंटन नीलामी के जरिए क्यों किया गया?"
जावड़ेकर के अनुसार राजा ने बार-बार कहा है कि उन्होंने हर स्तर पर प्रधानमंत्री से दिशानिर्देश लिया था।
जावड़ेकर ने कहा, "इस बात का स्पष्टीकरण देना प्रधानमंत्री की बड़ी जिम्मेदारी है कि क्या राजा द्वारा अपनाए गए तरीके को उन्होंने निजी तौर पर मंजूरी दी थी। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी संदिग्ध है.. 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में भ्रष्टाचार का शर्मनाक सत्यापन सरकार के पूर्णरूप से अपाहिज हो जाने का सबूत है।"
ज्ञात हो कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में राजकोष को 170,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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