लिट्टे ने फिर से संगठित होने की बात खारिज की
एम.आर.नारायण स्वामी
नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। भारत में फिर से वैधानिक दर्जा हासिल करने की कोशिश में श्रीलंका के तमिल टाइगर्स ने केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम से कहा है कि वह फिर से संगठित होने की कोशिश नहीं कर रहा है और वह इस देश में किसी अनधिकृत गतिविधि में लिप्त नहीं है।
चिदम्बरम को लिखे एक खुले पत्र में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने भारतीय अधिकारियों के उस दावे को बिल्कुल असत्य बताया है, जिसमें कहा गया है कि लिट्टे का नक्सलियों के साथ सम्पर्क है।
पांच नवम्बर को लिखे इस पत्र को लिट्टे समर्थक वेबसाइट्स पर फिर से जारी किया गया है। माना जाता है कि यह वेबसाइट्स पश्चिम से संचालित किए जाते हैं। इस पत्र की प्रतियां विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि के नाम भी हैं।
पत्र पर लिट्टे मुख्यालय के समन्वयक आर.एम.सुपान का हस्ताक्षर है। समझा जाता है कि सुपान लिट्टे की मीडिया शाखा का नेतृत्व करने वाले किसी व्यक्ति का छद्म नाम है।
ज्ञात हो कि श्रीलंकाई सेना ने मई 2009 में वेलुपिल्लै प्रभाकरन सहित लिट्टे के शीर्ष नेताओं की हत्या कर लिट्टे का खात्मा कर दिया था और इसके साथ ही दुनिया के एक सबसे लम्बे रक्तरंजित विद्रोह का अंत हो गया था।
इस संगठन के नष्ट हो जाने के बावजूद पश्चिमी देशों में स्थित इसके समर्थक अभी भी श्रीलंका के पूर्वोत्तर हिस्से में अलग तमिल राज्य का सपना बुनते हैं। लेकिन तमिल प्रवासियों में लिट्टे के समर्थक बंटे हुए हैं।
पश्चिम में लिट्टे समर्थकों की संख्या हजारों में है। लेकिन ये लड़ाके नहीं हैं। 2009 की सैन्य कार्रवाई के दौरान जीवित बच गए लिट्टे के अधिकांश लड़ाके श्रीलंका के कब्जे में हैं।
चिदम्बरम के नाम लिट्टे का यह पत्र इस बात को रेखांकित करता है कि लिट्टे लड़ाके मई 2009 से किसी सशस्त्र गतिविधि में शामिल नहीं हैं।
पत्र में श्रीलंका सरकार और कुछ अन्य एजेंसियों पर आरोप लगाया गया है, जो "विनाशकारी गतिविधियों के लिए हमारा और हमारे कुछ लड़ाकों का नाम ले रहे हैं, जो कि आत्मसमर्पण कर चुके हैं।"
पत्र में कहा गया है, "सरकार की इस कार्रवाई को पड़ोसी देशों द्वारा और यहां तक कि कुछ दूसरे देशों द्वारा भी अपनी सुविधानुसार तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।" पत्र में इस बात का स्पष्टीकरण नहीं है कि किन देशों के बारे में बात की जा रही है।
पत्र में आगे कहा गया है कि लिट्टे पुनर्गठित होने की कोशिश नहीं कर रहा है और भारत या अन्य किसी देश में किसी अनधिकृत गतिविधि में लिप्त नहीं है।
पत्र में कहा गया है, "विदेशी सशस्त्र संगठन के रूप में अपने से सम्बंधित दुर्भावनापूर्ण बयानों को हम सिरे से खारिज करते हैं और कड़े शब्दों में की इसकी निंदा करते हैं।"
पत्र में कहा गया है कि लिट्टे के सदस्यों को भारत में या अन्य दूसरे देशों में अपना बचाव करने से रोका जा रहा है। पत्र में लिखा है, "हम आग्रह करते हैं कि हमें अपने पक्ष को रखने का अवसर दिया जाए.. हम किसी भी अदालत में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।"
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि लिट्टे का पत्र यह बताने का प्रयास है कि यह संगठन अभी जिंदा है, साथ ही संगठन से प्रतिबंध हटाने के लिए नई दिल्ली को प्रभावित करने का भी यह एक प्रयास है।
एक अधिकारी ने कहा, "इस पत्र का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि हमें सच्चाई पता है। हम यह भी जानते हैं कि लिट्टे फिर से संगठित नहीं हो रहा है। इस तरह के पत्रों का इस्तेमाल इस मामले की मजबूती के लिए किया जाएगा कि लिट्टे पर भारत द्वारा लगाया गया प्रतिबंध अनावश्यक है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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