जी-20 सम्मेलन : प्रधानमंत्री का वैश्विक अर्थव्यवस्था में नए संतुलन पर जोर (लीड-1)
सियोल, 12 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान वश्विक अर्थव्यवस्था में नए सिरे से संतुलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमीर देशों से आने वाले कोष को गरीब और उभरती अर्थव्यवस्था वाले राष्ट्रों के बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास में लगाया जाना चाहिए ताकि अस्थिरता रोकी जा सके।
मनमोहन सिंह ने अमीर राष्ट्रों में बेरोजगारी के मद्देनजर संरक्षणवाद के खिलाफ आगाह भी किया। उन्होंने कहा कि जी-20 नेतृत्व को इस बात का निर्धारण करने के लिए आपसी आकलन प्रक्रिया पर सहमत होना चाहिए कि प्रत्येक देश में किस स्तर का घाटा या अधिशेष अच्छा या बुरा है।
यहां आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के एक सामान्य सत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था को नए सिरे से संतुलित बनाने में आ रही समस्याओं से हम अच्छी तरह परिचित हैं।" उन्होंने कहा कि कुछ देशों के घाटे अमीर देशों द्वारा निवेश के जरिए पूरे किए जाने चाहिए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में संकुचन की स्थिति न पैदा हो।
सिंह ने कहा, "यहां तक कि हमें विकासशील देशों की ओर परिवर्तनशील पूंजी प्रवाह में वृद्धि को अस्थिर करने से बचने की कोशिश करनी चाहिए। इन देशों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दीर्घकालिक प्रवाह के समर्थन का एक मजबूत आधार है, वह भी खासतौर से बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ऐसा होना चाहिए।"
सिंह का इशारा भारी घाटा उठा रहे अमेरिका जैसे देशों की ओर था, जिसके घाटे को कम करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षो में सब सहारा अफ्रीका के कई बाजारों सहित उभरते बाजारों के आर्थिक प्रदर्शन में काफी हद तक सुधार हुआ है। भारत एक ऐसा देश है, जो अधिक निवेश को आकर्षित कर सकता है।
उन्होंने कहा, "ये देश फिलहाल इस स्थिति में हैं कि वे निवेश में निर्धारित विस्तार तक पूंजी प्रवाह को पचा सकते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में जरूरी मांग पैदा करेगा।"
सिंह ने कहा, "विकासशील देशों में अधिशेष बचत को निवेश में बदलने से न केवल तात्कालिक मांग में असंतुलन को दूर किया जा सकेगा, बल्कि इससे विकास सम्बंधी असंतुलन को दूर करने में भी मदद मिलेगी। दूसरे शब्दों में, हमें एक तरह के असंतुलनों के जरिए दूसरे तरह के असंतुलनों को दूर करने का लाभ उठाना चाहिए।"
व्यवस्थागत नीति असंतुलनों के आकलन के लिए पिछले वर्ष पिट्सबर्ग में जी-20 के स्तर पर स्वीकृत आपसी आकलन प्रक्रिया के बारे में सिंह ने आशा व्यक्त की कि सियोल शिखर सम्मेलन देश केंद्रित समीक्षाओं की ओर बढ़ेगा।
सिंह ने कहा, "मैं मानता हूं कि यह काम आसान नहीं है और हमें करके सीखने की पद्धति अपनाने के लिए पर्याप्त रूप से लचीला होना चाहिए। लेकिन हम वाकई में ऐसा करें, हमें एक नई शैली के वैश्विक शासन में स्थायी योगदान करना होगा।"
मनमोहन सिंह ने कहा कि जी-20 के नेताओं में विभिन्न मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद चार क्षेत्रों में सहमति है। ये चार क्षेत्र कुछ इस प्रकार हैं:
- किसी भी कीमत पर प्रतिस्पर्धात्मक अवमूल्यन से बचा जाना चाहिए और संरक्षणवाद के पुररुत्थान को रोका जाना चाहिए।
- अधिक घाटे वाले देशों को वित्तीय समेकन नीतियों का अनुसरण करना चाहिए।
- ढांचागत सुधारों से घाटे वाले देशों में क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़नी चाहिए और अधिशेष राष्ट्रों में घरेलू मांग बढ़नी चाहिए।
- देशों को पूंजी प्रवाह को अस्थिर किए बगैर आदान-प्रदान के मामले में लचीला होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन के मेजबान दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली मियूंग बाक को नेताओं के बीच सहमति बनाने की उनकी पहल के लिए तथा जी-20 में पहली बार विकास के एजेंडे को शामिल करने के लिए बधाई दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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