रुचिका मामला : राठौड़ को मिली जमानत (राउंडअप)

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी.सथसिवम एवं न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की खंडपीठ ने जमानत मंजूर करते हुए हालांकि कहा, "वह (राठौड़) चण्डीगढ़ के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की विशेष अनुमति लिए बिना देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।"

अदालत ने वरिष्ठ वकील उदय ललित का यह बयान भी दर्ज किया कि राठौड़ का पासपोर्ट चण्डीगढ़ के सत्र न्यायाधीश के पास जमा है।

अदालत ने यह भी कहा कि मामले की 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा था कि राठौड़ के खिलाफ तीन प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के सिलसिले में जांच जारी है जो राठौड़ को जमानत दिए जाने के पक्ष में नहीं है।

गुरुवार को अदालत ने सीबीआई द्वारा तीन में से दो एफआईआर के सम्बंध में मामले को बंद करने संबंधी रिपोर्ट को संज्ञान में लिया। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वह तीसरे मामले को बंद करने के सम्बंध में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद रिपोर्ट पेश करेगी।

अतिरिक्त महान्यायवादी हरिन रावल ने कहा कि वह चाहते हैं कि अदालत कुछ शर्त लगाए, न्यायमूर्ति सथासिवम ने कहा, "मामला यदि विचाराधीन होता, तब शर्त के लिए आपका कहना न्यायसंगत होता। आप पहले ही कह चुके हैं कि मामले खत्म हो चुके हैं।"

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कई बार मौत की सजा के मामले में अदालत पांच वर्ष जेल की सजा पूरी होने पर दोषी की जमानत याचिका पर विचार करती है।

अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में निचली अदालत ने राठौड़ को मूलत: छह माह जेल की सजा सुनाई थी, जिसे सीबीआई की अपील पर बढ़ाकर 18 माह कर दी गई।

पीड़ित परिवार की ओर से अदालत में मौजूद वकील विकास मेहता ने कहा कि जमानत देने से पहले अदालत को राठौड़ से जुड़े तथ्यों पर गौर करना चाहिए।

पीड़ित पक्ष के पैरोकारों में एक आनंद प्रकाश ने मामले के दोषी हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस. राठौड़ को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने को चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की।

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को राठौड़ को जमानत दे दी। इस मामले में निचली अदालत ने राठौड़ को 18 महीने की सजा सुनाई थी। राठौड़ इन दिनों चण्डीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद हैं। 69 वर्षीय राठौड़ ने वर्ष 1990 में 14 साल की रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ की थी। इसके तीन साल बाद 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।

आनंद रुचिका की दोस्त आराधना के पिता हैं। उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "मैं मानता हूं कि जमानत की गुहार लगाना राठौड़ का अधिकार है लेकिन हम उसे जमानत देने के फैसले को चुनौती देंगे। हम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा मामले की अंतिम रिपोर्ट अम्बाला की अदालत में दायर किए जाने पर भी विरोध जताएंगे।"

आनंद ने कहा, "हमने सीबाआई को राठौड़ के खिलाफ सभी पुख्ता सुबूत मुहैया कराए थे। हमने गृह मंत्रालय को भी बताया था कि मामले की जांच कर रही सीबीआई राठौड़ को फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रही है।"

उधर, रुचिका के पिता एस.सी. गिरहोत्रा ने आईएएनएस से कहा, "मैं इस फैसले से बहुत दुखी हूं। यह कितनी घृणित बात है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने 14 साल की बच्ची के साथ दुर्व्यवहार किया। हम और देश की जनता भी चाहती है कि राठौड़ को ऐसी सजा मिले जो अपने आप में मिसाल हो ताकि कोई और ऐसी हरकत करने की हिमाकत न करे।"

उन्होंने कहा, "वैसे इसको लेकर चिंता करने की बात नहीं है। अभी सिर्फ जमानत मिली है। राठौड़ को मिली सजा में कोई कटौती नहीं हुई है। सीबीआई ने अम्बाला की अदालत में अंतिम रिपोर्ट दायर की। यह पूरी तरह से एकपक्षीय बात है। हम इसे भी चुनौती देंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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