बर्मा में सू ची की अपील ख़ारिज

चुनाव बहिष्कार के कारण आंग सान सू ची के दल को भंग कर दिया गया था
बर्मा के उच्चतम न्यायालय ने नज़रबंदी के ख़िलाफ़ प्रजातंत्र-समर्थक नेता आंग सान सू ची की याचिका ख़ारिज कर दी है.
हालांकि अदालत ने ये नहीं बताया कि वह सू ची की अपील क्यों ख़ारिज कर रही है.
उनके वकील एनयान विन ने कहा, “अदालत ने हमारी अपील ख़ारिज कर दी है वहीं कोर्ट के पुराने फ़ैसले को बरक़रार रखा गया है.”
उनका कहना था कि ये सरासर ग़लत फ़ैसला है और देश में न्याय व्यवस्था की स्थिति को र्दशाता है.
सू ची के नज़रबंदी की अवधि 13 नवंबर को ख़त्म हो रही है और उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उन्हें शनिवार को क़ैद से रिहा कर दिया जाएगा.
उम्मीद टूटी
रविवार को ही देश में चुनाव हुए हैं.
नाबेल शांति विजेता सू ची के राजनीतिक दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने इस चुनाव का बहिष्कार किया था.
माना जा रहा है कि इसकी वजह से सैनिक शासन समर्थित उम्मीदवारों की जीत निश्चित हो गई थी और सत्ता पर अपनी पकड़ और मज़बूत होने के बाद वह नज़रबंद नेता से उतना ख़तरा नहीं महसूस करेंगें और उन्हें रिहा कर देंगें.
देश में पिछले चुनाव 1990 में हुए थे जिसमें नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी को भारी बहुमत मिला था.
लेकिन बर्मा को फ़ौजी शासकों ने चुनाव के नतीजों की स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.
आंग सान सू ची को पिछले लगभग 21 सालों में से 15 साल तक नज़रबंद रखा गया है.
उनके वकील ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि सू ची किसी शर्त के साथ रिहा होने को तैयार नहीं हैं.


Click it and Unblock the Notifications