भारत और दक्षिण कोरिया के बीच परमाणु समझौता जल्द
सियोल, 11 नवंबर (आईएएनएस)। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच जल्द ही एक असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर हो सकता है। यह जानकारी जानकार सूत्रों ने गुरुवार को यहां दी।
जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर मौके पर एक प्रमुख सूत्र ने कहा, "बस हस्ताक्षर करने भर की देरी रह गई है।"
ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने सियोल में है।
इसके पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने पिछले महीने हनोई में संवाददाताओं से कहा था कि समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान मनमोहन सिंह और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली म्यंग-बाक के बीच बैठक के बाद मेनन ने कहा था, "बस हस्ताक्षर होने का इंतजार है।"
सूत्रों ने कहा है कि कुछ मामूली मुद्दे सुलझाने बाकी रह गए हैं।
ज्ञात हो कि दक्षिण कोरिया, परमाणु व्यापार के क्षेत्र में छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। दक्षिण कोरियाई सरकार द्वारा संचालित कोरिया इलेक्ट्रिक पॉवर कॉर्प ने सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी, भारतीय परमाणु विद्युत निगम के साथ तकनीकी मामलों के आदान-प्रदान और डाटा आदान-प्रदान में सहयोग के लिए अगस्त महीने में एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था।
1970 के दशक के मध्य और 1990 के दशक के अंत में भारत के परमाणु अलगाव का कारण बना कनाडा शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत के साथ परमाणु ऊर्जा समझौता करने वाला नौवां देश बन गया है।
अन्य देशों में अमेरिका, फ्रांस, रूस, मंगोलिया, कजाकस्तान, अर्जेटीना, नामीबिया और ब्रिटेन शामिल हैं।
आधिकारिक आंकड़े के अनुसार भारत में छह स्थानों पर फिलहाल 19 परमाणु रिएक्टर हैं। ये सभी रिएक्टर सरकार द्वारा संचालित भारतीय परमाणु विद्युत निगम द्वारा संचालित किए जाते हैं। इन रिएक्टरों की विद्युत उत्पादन क्षमता 4,560 मेगावाट है।
नए परमाणु समझौते के जरिए देश में 2020 तक 21,180 मेगावाट परमाणु विद्युत उत्पादन का लक्ष्य है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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