रुचिका मामला: राठौड़ को जमानत, देश छोड़ने पर रोक (लीड-2)
इस मामले में निचली अदालत ने राठौड़ को 18 महीने की सजा सुनाई थी। यहां गुरुवार को न्यायमूर्ति पी. सथसिवम और न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की खण्डपीठ ने राठौड़ को जमानत देते हुए बिना इजाजत देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है।
न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा पहले ही दायर की गई अंतिम रिपोर्ट को संज्ञान में लिया। यह रिपोर्ट राठौड़ के खिलाफ पहले की दो प्राथमिकियों के आधार पर दायर की गई थी।
अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता हरीन रावल की ओर से दिए गए हलफनामे को भी संज्ञान में लिया। रावल ने अदालत को बताया कि सीबीआई राठौड़ के खिलाफ दर्ज तीसरी प्राथमिकी के आधार पर भी अंतिम रिपोर्ट दायर करेगी।
न्यायालय ने इस मामले पर पिछली सुनवाई 27 अक्टूबर को थी। उस वक्त रावल ने इस आधार पर राठौड़ को जमानत दिए जाने का विरोध किया था कि उसके खिलाफ अभी तीन प्राथमिकियां लम्बित हैं।
राठौड़ इन दिनों चण्डीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद है। 69 वर्षीय वर्षीय राठौड़ ने वर्ष 1990 में 14 साल की रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ की थी। इसके तीन साल बाद 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।
चण्डीगढ़ के एक सत्र न्यायालय ने बीते 25 मई को राठौड़ को 18 महीने की सजा सुनाई थी। रुचिका के साथ दुव्यर्वहार के वक्त राठौड़ हरियाणा पुलिस में उप महानिरीक्षक होने के साथ ही हरियाणा लॉन टेनिस संघ का अध्यक्ष भी था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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