'आर्थिक सुधार की ख़ातिर एकजुट हों सभी देश'

ओबामा ने देशों से आर्थिक मंदी से लड़ने के लिए मतभेद भूलकर एकजुट होने का आहवान किया है.
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दुनिया के नेताओं से अपने मतभेद दरकिनार कर आर्थिक मंदी से लड़ने के लिए एकजुट होने की अपील की है.
सिओल में जी20 बैठक शुरू होने से पहले ओबामा ने कहा है कि अमरीका दूनिया में नई नौकरियां पैदा करने और वैश्विक आर्थिक असंतुलन को कम करने में अपनी भूमिका निभाएगा.
लेकिन दक्षिण कोरिया में सम्मेलन शूरू होने से पहले एक बयान में ओबामा ने कहा है कि वे ये सब अकेले नहीं कर पाएंगे.
ओबामा ने कहा कि जब सारे राष्ट्र अपने हिस्से का प्रयास करेंगे तो सभी को बेहतर विकास दर का लाभ मिलेगा.
अमरीका के राष्ट्रपति का ये बयान ऐसे वक़्त में आया है जब इस बात की आशंका जताई जा रही है कि गुरुवार से शुरु हो रहा जी20 सम्मेलन चीन और अमरीका के व्यापारिक असंतुलन और 'केरंसी वॉर' में उलझ कर रह जाएगा.
कैमरन ने चीन से व्यापारिक असंतुलन सही करने को कहा है.
इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भी अमरीका-चीन की बयानबाज़ी में कूद पड़े थे, जब उन्होंने चीन को चेतावनी दी थी कि वो अपना व्यापारिक असंतुलन सही करे.
बीजिंग विश्वविद्यालय में एक भाषण में कैमरन ने कहा कि चीनी निर्यात की कामयाबी दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के लिए संभावित ख़तरा बन सकती है.
चीन के बड़े व्यापारिक सरप्लस की वजह उसकी करेंसी यूआन का कमज़ोर होना बताई जाती है जिससे चीनी निर्यातकों को सहायता मिलती है.
लेकिन जी20 सम्मेलन से पहले चीन के राष्ट्रपति हू जिनताओ ने कहा है कि 'देशों को अपनी समस्याओं का सामना स्वयं करना होगा.'
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार चीन की ट्रेड सरप्लस देश के आर्थिक प्रगति की रफ़्तार के कम होने के बावजूद अक्तूबर माह में 27 अरब अमरीकी डॉलर हो गया है.
आलोचक मानते हैं कि बीजिंग जानबूझ कर अपनी मुद्रा को सस्ता रखता है जिस वजह से उसे अपने निर्यात को बढ़ावा देने में सहायता मिलती है और इसके चलते चीन में विदेशी मुद्रा का एक बड़ा भंडार जमा हो गया है.


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