जी-20 सम्मेलन : 'भारत खुले आर्थिक विकास का पक्षधर' (लीड-3)
सियोल रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक प्रतिबद्धाताओं और राष्ट्रों के हितों के बीच सही संतुलन बनाने का पुरजोर समर्थन करेगा। उन्होंने कहा इस शिखर सम्मेलन का जी-8 देशों से बाहर एशिया में आयोजित होना महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, "व्यापक चुनौतियों के मद्देनजर यह भारत के हित में है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी स्थानांतरण और खुले बाजार में एक खुला, स्थायी और नियम आधारित आर्थिक माहौल बने।"
सिंह ने कहा, "हम सभी को संरक्षणवादी सोच से खुद को अलग करना होगा। दुनिया के विभिन्न देशों के बीच आज भी विकास से जुड़े असंतुलन हैं। विश्व अर्थव्यवस्था को फिर से संतुलित बनाना एक बड़ी चुनौती है।"
सियोल में हो रहे इस सम्मेलन का मुख्य बिंदु स्थायी और संतुलित विकास है। इस बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, "हम आर्थिक विकास से जुड़े संतुलन के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करेंगे। सियोल में हम इस बात की कोशिश करेंगे कि विकास के एजेंडे पर जी-20 मुख्य तौर पर अपना ध्यान केंद्रित करे।"
मनमोहन सिंह का यह तीन दिनों का सियोल दौरा वैश्विक वित्तीय स्थिरता को हासिल करने के संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण के लिहाज से बेहद अहम है। भारत यहां मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्था की भूमिका के विस्तार पर जोर देगा। भारत इस सम्मेलन के दौरान विकसित, विकासशील और गरीब देशों के बीच विकास का संतुलन बनाने के अपने रुख को पुरजोर ढंग से रखने की कोशिश करेगा।
इस सम्मेलन में शामिल होने के साथ प्रधानमंत्री कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी करेंगे। वह मुख्य रूप से दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति बाक से मिलेंगे जहां दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और केंद्रीय वित्त सचिव अशोक चावला हैं।
वर्ष 1999 में गठित हुए जी-20 में भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ हैं।
प्रधानमंत्री ने सोमवार को अमेरिका और चीन के मुद्रा बाजारों का हवाला देते हुए कहा था कि दुनिया को अमीर और गरीब देशों के बीच एक नया संतुलन बनाने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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