जी-20 सम्मेलन : नया दृष्टिकोण पेश करेगा भारत (लीड-2)
मनमोहन सिंह का यह तीन दिनों का दौरा वैश्विक वित्तीय स्थिरता को हासिल करने के संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण के लिहाज से बेहद अहम है। भारत यहां मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्था की भूमिका के विस्तार पर जोर देगा। भारत का लक्ष्य इस सम्मेलन के दौरान विकसित, विकासशील और गरीब देशों के बीच विकास का संतुलन बनाने के अपने रुख को पुरजोर ढंग से रखने का है।
इस सम्मेलन में शामिल होने के साथ प्रधानमंत्री कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी करेंगे। वह मुख्य रूप से दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति बाक से मिलेंगे जहां द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री के साथ गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और केंद्रीय वित्त सचिव अशोक चावला हैं।
वर्ष 1999 में गठित हुए जी-20 में भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ हैं।
प्रधानमंत्री ने सोमवार को अमेरिका और चीन के मुद्रा बाजारों का हवाला देते हुए कहा था कि दुनिया को अमीर और गरीब देशों के बीच एक नया संतुलन बनाने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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