'नहाय-खाय' से शुरू हुआ छठ पर्व
छठ पर्व के पहले दिन छठ व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन करते हैं। इसके बाद सूर्य की उपासना शुरू हो जाती है। स्नान के बाद परम्परा के अनुसार अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी खाई जाती है। नहाय-खाय के बाद से घर की शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
छठ पर्व में शुद्धता रखने के कारण पटना में हर तरफ साफ-सफाई का दौर प्रारम्भ हो गया है। गली-मोहल्लों के साथ-साथ नदियों के घाटों पर भी साफ-सफाई का अभियान जारी है। पटना में गंगा नदी के तट पर 78 घाटों को छठ व्रतियों के लिए सूर्य को अघ्र्य देने की व्यवस्था की गई है।
पंडित मदन मोहन के अनुसार नहाय-खाय के दूसरे दिन छठ व्रती उपवास रखती हैं तथा संध्या में पूजा के बाद 'खरना' करती हैं। खरना में व्रती रोटी और खीर ग्रहण करती हैं। खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारम्भ हो जाता है, जो तीसरे दिन सुबह सूर्य को अघ्र्य देने के बाद सम्पन्न होता है।
पटना नगर निगम आयुक्त मनीष कुमार के अनुसार गंगा घाटों की सफाई का कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि छठ व्रतियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि बुधवार शाम तक गंगा घाटों पर सफाई और रोशनी का इंतजाम पूरा कर लिया जाएगा। वैसे कई क्षेत्रों में छठ पूजा समितियों द्वारा भी सफाई का कार्य किया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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