'यूएनएससी में भारत का समर्थन चीन को जवाब देने की कोशिश'
वाशिंगटन, 9 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन की घोषणा को अमेरिकी मीडिया में चीन को जवाब देने की एक कोशिश के रूप में देखा गया है।
समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' ने कहा है कि स्थाई सीट के लिए भारत का समर्थन कर ओबामा ने दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच एक गहरी साझेदारी विकसित करने के अमेरिका के इरादे का संकेत दिया है। यह साझेदारी व्यावसायिक सम्बंधों को विस्तार देगी और तेजी से मुखर हो रहे चीन के प्रभाव को रोकेगी।
'वाशिंगटन पोस्ट' ने इससे सहमति जताते हुए कहा है यह भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक आकांक्षाओं का एक जोरदार समर्थन है, लेकिन यह सम्भवत: चीन और पाकिस्तान को नाराज करेगा।
'द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर' ने कहा है ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की भारत की कोशिश का अमेरिका के जोरदार समर्थन द्वारा भारतीय संसद को बहुत प्रभावित किया है।
अखबार ने कहा है, "लेकिन दुनिया के अति महत्वपूर्ण और ताकतवर इस क्लब में भारत के शामिल होने के लिए ओबामा के चापलूसीपूर्ण सत्यापन का यह अर्थ बिल्कुल नहीं होता कि भारत निकट भविष्य में न्यूयार्क स्थित सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की सूची में अपना नाम दर्ज होने की उम्मीद करे।"
अखबार ने संयुक्त राष्ट्र की एक पूर्व अधिकारी और वर्तमान में न्यूयार्क के कोलम्बिया युनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय मामलों की विशेषज्ञ मिशेल डोयले के हवाले से कहा है, "वास्तविक सुधार की सहमति हासिल कर पाना व्यावहारिक और राजनीतिक, दोनों कारणों से आसान नहीं होगा।"
'लॉस एंजिल्स टाइम्स' ने ओबामा के समर्थन को एक ताकतवर राष्ट्र के प्रति सम्मान का एक नाटकीय प्रदर्शन बताया है। उस राष्ट्र के प्रति, जिससे उन्हें उम्मीद है कि वह दुनिया भर में अमेरिकी हितों के समर्थन में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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