भारत को समर्थन से सुरक्षा परिषद में सुधार का रास्ता जटिल : पाकिस्तान
इस्लामाबाद, 9 नवंबर (आईएएनएस)। सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत को अमेरिकी समर्थन मिलने के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है और उसने कहा है कि इससे सुरक्षा परिषद की सुधार की प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को बयान दिया है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी रुख का संज्ञान इसलिए लिया क्योंकि वह सैद्धांतिक आधार पर सुरक्षा परिषद में विस्तान का पक्षधर रहा है।
उसने भारत पर विस्तारवादी होने का आरोप लगाया है और कहा कि यह सुरक्षा परिषद के चार्टर से मेल नहीं खाता है।
उसने अमेरिका को नसीहत दी कि अमेरिका को इस क्षेत्र में शक्ति की राजनीति नहीं कर नैतिकता की राजनीति करनी चाहिए।
ओबामा ने सोमवार को भारत यात्रा के दौरान सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारतीय दावेदारी का समर्थन किया। उधर पाकिस्तान लगातार यह कहकर विरोध करता रहा है कि इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन गड़बड़ा जाएगा।
ओबामा ने सोमवार को भारतीय संसद के संयुक्त अधिवेश को संबोधित करते हुए कहा कि वह विश्व में न्याय और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ताकतवर, भरोसेमंद और न्यायोचित सुरक्षा परिषद चाहता है और इसलिए आने वाले समय में सुरक्षा परिषद में सुधार चाहते हैं, जिसमें भारत का दर्जा स्थायी सदस्य का हो।
उधर कश्मीर का राग छेड़ते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) असलम घुम्मान ने कहा कि स्थायी सदस्यता से भारत को वीटो पावर मिल जाएगा, जिससे वह कश्मीर मसला का हल कभी नहीं होने देगा।
राजनीति विश्लेषक हसन अस्कारी रिजवी ने कहा कि अमेरिकी समर्थन को लेकर आश्चर्य नहीं करना चाहिए क्योंकि भारत के साथ उसके राजनीतिक और व्यावसायिक हित जुड़े हुए हैं। उसने कहा कि पाकिस्तान को अपनी विदेश नीति पर फिर से विचार करना चाहिए और इस क्षेत्र में इस देश के महत्व को स्वीकार करना चाहिए।
भारत यात्रा के पहले दिन ओबामा के पाकिस्तान के नाम का उल्लेख नहीं करने के कारण पाकिस्तान के नेता बहुत खुश थे, लेकिन सोमवार को संसद में संबोधन के बाद उनकी खुशियां गायब हो चुकी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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