इराक पर हमला जायज, माफी नहीं मागूंगा : बुश
उन्होंने यह भी कहा कि जब अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना इराक में जनसंहारक हथियारों को नहीं तलाश पाई तो उन्हें बहुत गुस्सा आया था। बुश ने सोमवार रात अपने संस्मरण 'डिसीजन प्वाइंट्स' के बाजार में आने की पूर्व संध्या पर दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही।
समाचार चैनल 'एनबीसी' को दिए साक्षात्कार में बुश ने कहा, "मैं यह कहना चाहूंगा कि सद्दाम हुसैन की सत्ता के बगैर आज दुनिया पहले से बेहतर स्थिति में है। आज इराक में 2.5 करोड़ लोगों के पास पूरी आजादी के साथ जिंदगी जीने का मौका है।"
बुश की यह पुस्तक मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में आ गई। जनवरी 2009 में राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद बुश का यह पहला साक्षात्कार था। इससे पहले वह कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आए थे।
अमेरिका के इस पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, "इतिहास आपके फैसलों के आधार आपके बारे में फैसला करता है। मेरा मानना है कि अगर आज सद्दाम सत्ता में होता तो वह पहले से अधिक समृद्ध होने के साथ ही और आक्रामक भी हो जाता।"
बुश ने इराक पर हमले को लेकर इस संदर्भ में माफी मांगने से इंकार कर दिया कि वहां जनसंहारक हथियार नहीं बरामद किए गए थे। उल्लेखनीय है कि 2003 में बुश प्रशासन ने जनसंहारक हथियारों का हवाला देते हुए इराक पर हमला किया था।
उन्होंने कहा, "माफी मांगने का मतलब यह होगा कि इराक पर हमले का फैसला गलत था। मैं नहीं मानता कि वह एक गलत फैसला था। मैंने उस वक्त यही एक रास्ता सही पाया। इसे में गलत फैसला नहीं कहूंगा।"
9/11 की वारदात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब यह हमला हुआ तो उस वक्त वह फ्लोरिडा के एक स्कूल में बच्चों के साथ थे। उन्होंने कहा, "मैं इस बारे में सुनकर बहुत क्रोधित हुआ और एक पल के लिए सोचा कि उन लोगों की अमेरिका पर हमला करने की कैसे हिम्मत हुई? फिर मैंने बच्चों की ओर देखा। मैं जानता था कि मेरा काम अपने लोगों की रक्षा करना है।"
गौरतलब है कि 9/11 के आतंकवादी हमले में हजारों लोग मारे गए थे। इसके तत्काल बाद बुश प्रशासन ने अफगानिस्तान पर हमला बोल तालिबान शासन को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इस हमले के बाद आतंकवाद को लेकर अमेरिका के दृष्टिकोण में बड़ा परिवर्तन आया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications