पहली आधुनिक राडार प्रणाली अगले वर्ष के अंत तक
नई दिल्ली, 9 नवंबर (आईएएनएस)। देश में घरेलू स्तर पर विकसित की गई पहली एयरबोर्न अर्ली वार्निग कंट्रोल (एईडब्ल्यूएंडसी) प्रणाली तैयार हो चुकी है और उसे एक 'एमब्रेयर 145' लड़ाकू मिमान में लगाने के लिए जल्द ही ब्राजील भेजा जाने वाला है।
आधुनिक राडार के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए भारतीय अनुसंधान की यह घटना एक बड़ा मील का पत्थर है, और इस प्रणाली की सफलता के आधार पर वायुसेना (आईएएफ) और नौसेना (आईएन) आने वाले वर्षो में कई सारे राडार हासिल कर सकेंगे। फिलहाल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) वायु सेना के लिए इस प्रणाली की तीन प्रतियां विकसित कर रहा है, और उसके लिए लम्बी दूरी के तीन एमब्रेयर 145 लड़ाकू विमानों का आर्डर दिया है।
डीआरडीओ के मुख्य नियंत्रक (एसआई) प्रहलाद ने रक्षा मामलों की पत्रिका 'इंडिया स्ट्रेटजिक' (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट इंडियास्ट्रेटजिक डॉट इन) को बताया कि पहला एमब्रेयर जनवरी 2011 में आना है और भारतीय एईडब्ल्यू एंड सी राडार 2011 के अंत तक सेवा में शामिल किया जाएगा।
इस प्रणाली को पूरी तरह सत्यापित होने में कुछ वर्ष और लगेंगे।
वायुसेना और नौसेना को छोटी से लम्बी दूरी और व्यापक क्षेत्र को कवर करने वाले विभिन्न स्तर की राडार क्षमताओं की आवश्यकता है। वायुसेना के पास पहले से ही इजरायली फाल्कन एडब्ल्यूएसी हैं, जो रूसी आईएल 76 विमान पर लगे हुए हैं और तीसरा अगले वर्ष के प्रारम्भ तक आने वाला है। इसके अलावा ऐसी दो और प्रणालियों का आर्डर दिया जा चुका है। वायुसेना नार्थरोप ग्रुमान के मल्टी-रोल इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरी (एमईएसए) राडार से सुसज्जित बोइंग 737-700 एईडब्ल्यूएंडसी के इंतजार में है। इस तरह की प्रणाली आस्ट्रेलिया को पहले ही बेची जा चुकी है।
नौसेना, 12 बोइंग पी8-आई मल्टी मिशन मैरीटाइम एयरक्राफ्ट (एमएमए) के लिए आर्डर दे रहा है, लेकिन अपनी इस क्षमता को बढ़ाने के लिए उसे कुछ घरेलू क्षमता की भी आवश्यकता होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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