ओबामा की इस यात्रा से क्या हासिल होगा?

ओबामा के भारत दौरे में पाकिस्तान का जिक्र न होने के बारे में उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो भी मतभेद हैं, उनका हल दोनों देशों को ही निकालना चाहिए। हमें पाकिस्तानियों से उनसे जुड़े मसलों पर बात करनी चाहिए। इन विषयों के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना बिल्कुल गलत है, क्योंकि उनके अपने हित और स्वार्थ हैं। यह उचित नहीं है कि आजादी के 65 साल पूरे करने वाला भारत जैसा विशाल देश अमेरिका से घुटने टेक कर कहे कि पाकिस्तान से हमें बचाओ। क्या हमारे अंदर स्वाभिमान जैसी कोई चीज नहीं है।
मुझे बहुत दुख होगा यदि इस मामले में अमेरिका का दखल हो। भारत पाकिस्तान के जो भी विषय हैं, उनका हल हम दोनों देशों को ही निकालना चाहिए। इसके लिए गैरों पर निर्भर रहना गलत है। आज जब पूरी दुनिया आतंकवाद का सामना कर रही है तो हम सिर्फ अमेरिका का जिक्र क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक विषय है और इस पर चर्चा करना ठीक है, लेकिन भोपाल गैस त्रासदी को लेकर हम कोई बात क्यों नहीं करते।
यह मुद्दा बिल्कुल दब कैसे गया? पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक और लश्कर ए तैयबा के सदस्य डेविड हेडली के बारे में हमारे देश की सुरक्षा में उसने भी सेंध मारी की है। सब होने के बाद हमें इजाजत दी जा रही है कि हम उससे पूछताछ करें। दोनों देशों के बीच इस प्रकार का सहयोग विकसित करना चाहिए, जिससे ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। ओबामा को प्राग में दिए गए भाषण के कारण ही नोबेल शांति पुरस्कार मिला। उन्होंने तकरीबन वही कहा जो राजीव गांधी ने 1988 में कहा था। बीस साल के बाद भारत को ऐसा कदम उठाना चाहिए कि दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति अमेरिका और सबसे छोटी परमाणु शक्ति भारत मिलकर दुनिया को निरस्त्रीकरण की ओर अग्रसर करें।
लेखक- मीडिया क्लब ऑफ इंडिया के यूपी ब्यूरो चीफ हैं।












Click it and Unblock the Notifications