ओबामा यात्रा : सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन (लीड-3)

भारत को एक वैश्विक ताकत करार देते हुए ओबामा ने कहा, "मैं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार की ओर देख रहा हूं जिसमें भारत एक स्थाई सदस्य हो।"

संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सांसदों और विशिष्ट लोगों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवदियों के लिए पाकिस्तान सुरक्षित पनाहगाह नहीं हो सकता और उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अमेरिका में उच्च प्रौद्योगिकी के निर्यात पर लगी रोक को हटाने की घोषणा करते हुए कहा कि इससे भारत और तेजी से विकास करेगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बातचीत के बाद हैदराबाद हाऊस में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि उनका देश कश्मीर समस्या का हल नहीं ढूढ सकता, लेकिन दोनों देश यदि चाहें तो वह 'कोई भी भूमिका' निभा सकता है। कश्मीर को एक पुराना विवाद बताते हुए उन्होंने कहा कि तनाव घटाना भारत और पाकिस्तान दोनों के हक में है।

इस अवसर पर मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत, पाकिस्तान के साथ सभी मसले सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मनमोहन सिंह ने कहा, "स्थिर और शांत पाकिस्तान भारत, दक्षिण एशिया और सम्पूर्ण विश्व के हित में है। हम पाकिस्तान के साथ वार्ता को प्रतिबद्ध हैं।"

पाकिस्तान को भारत विरोधी आतंकवादी ढांचे को समाप्त करने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा, "आप एक ही समय वार्ता और आतंकवाद फैलाने वाला तंत्र बरकरार नहीं रख सकते।"

ओबामा ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि भारतीय नेता ने निजी और सार्वजनिक दोनों जगहों पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव घटाने की मंशा जाहिर की है।

ओबामा ने कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शांति की मंशा के प्रति गम्भीर एवं प्रत्यनशील हैं। ..इसलिए मुझे उम्मीद है कि दोनों पक्ष इस सबसे जटिल मसलों में से एक के समाधान के लिए कोई तंत्र विकसित कर सकेंगे।"

उन्होंने रविवार के 'शानदार रात्रिभोज' के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए भारत-अमेरिका सम्बंधों को अपरिहार्य बताया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस भागीदारी का दायरा आतंकवाद और उग्रवाद से मुकबला करने से लेकर जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे मसलों तक है।

ओबामा ने कहा कि मुम्बई में जिन प्रमुख व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए वे भारत को अमेरिका के शीर्ष व्यापारिक सहभागी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

ओबामा ने आउटसोर्सिग और मुम्बई में हुए व्यापारिक समझौते के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि आउटसोर्सिग के मसले पर दोनों देशों में पूर्वाग्रह से ग्रसित धारणा है जिसका कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसी कारण वह इस सच्चाई को उजागर कर रहे हैं कि इन समझौतों से अमेरिकी नागरिकों के लिए 50 हजार नौकरियां पैदा होने जा रही है और यह कोई एक तरफा मार्ग नहीं है।

ओबामा ने कहा, "जब कभी हमसे पूछा जाएगा कि भारतीय हमारी नौकरियां ले जा रहे हैं, तो मैं कहना चाहता हूं कि क्या आप जानते हैं कि उन्होंने हमारे लिए 50 हजार नौकरियां पैदा की है।"

इस बीच प्रधानमंत्री ने कहा है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) जैसे बहुपक्षीय संगठनों में सदस्यता के लिए अमेरिकी समर्थन का भारत स्वागत करता है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और अमेरिका ने अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक वार्ता व्यापक करने और अफ्रीका तथा अफगानिस्तान में संयुक्त कदम उठाने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री और ओबामा ने कहा कि दोनों देशों ने रणनीतिक सम्बंधों में समान भागीदारी की दिशा में काम करने का फैसला किया है जिसका विश्व शांति पर सकरात्मक और निर्णायक प्रभाव पड़ेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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